लखीमपुर खीरी। गर्भवती महिलाओं में हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। जिला महिला अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं में कई महिलाएं हाइपरटेंशन से पीड़ित पाई जा रहीं हैं। चिकित्सक उन्हें दवा के साथ उचित परामर्श दे रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाली करीब 100 महिलाओं में 20 प्रतिशत महिलाएं हाइपरटेंशन का शिकार हैं। जिला महिला अस्पताल के सर्जन डॉ. राकेश ने बताया कि हाइपरटेंशन की समस्या प्री एक्लेम्पसिया हाई बीपी का गंभीर रूप है। इससे गुर्दे और यकृत को नुकसान हो सकता है। उच्च रक्तचाप के कारण समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है। हाइपरटेंशन में जरा सी लापरवाही मां और गर्भस्थ शिशु को कई बीमारियों की चपेट में ला सकती है। वहीं, समय पर जांच व दवाएं न खाने से जटिलताएं बढ़ सकती हैं, इसलिए नियमित चिकित्सक की सलाह लेते रहे।
यह हैं लक्षण
उच्च रक्तचाप के दौरान गंभीर सिर दर्द, धुंधला दिखाई देना व चमकती रोशनी होना, चेहरे या हाथों में सूजन, ऊपरी पेट में दर्द, सांस लेने में कठिनाई आदि हो सकती है। इसलिए घर पर ब्लड प्रेशर चेक करें और डायरी बनाएं। दवाएं खाएं, कभी भी खुराक छूटने न दें। यूरिन जांच और भ्रूण की निगरानी के लिए हर दिन किक काउंट करें।
ऐसे करें बचाव
-नियमित चेकअप करवाकर रक्तचाप की निगरानी करें।
-गुनगुना पानी, सूप और ताजे फलों का जूस पर्याप्त मात्रा में लें।
-कम नमक व तेल वाला पौष्टिक आहार लें।
-हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें।
-डॉक्टर की सलाह पर घर के अंदर हल्की वॉक या योग करें।