भगवान श्रीरामचंद्र का प्राकट्य अयोध्या में शुक्लपक्ष की नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र में पांच ग्रहों के उच्च स्थान में आसीन होने पर हुआ था, किंतु भगवान का प्राकट्य महोत्सव प्रतिपदा से नवमी तक करने का विधान किया गया है।
श्रीआनंद रामायण में वर्णन है कि प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिन का उपवास कर श्रीरामचंद्र्र जी का पूजन करना परम कल्याणकारी है। नव संवत्सर की प्रतिपदा को घर में सबसे ऊपर वस्त्र पुष्पमाला से सजी ध्वजाएं लगाकर श्रीरामचंद्र जी का पूजन शुरू करना चाहिए। इस दिन घर, देवालय, गोशाला, तुलसी वाटिका आदि में चंदन मिश्रित जल छिड़ककर लाल, नीले, पीले रंग से पत्थर चूर्ण बालू को रंगकर सूखने के बाद सुंदर चौक, कमल, रंगोली बनाएं। उसके ऊपर रंग-बिरंगा, चार दरवाजों वाला मंडप बनाएं, जिसे केले के पेड़ और गन्ने से सजाकर शीशे, घंटे, घंटियां लटका दें। मंडप के ऊपर सुंदर चांदनी लगाकर मोतियों की मालाएं लगाकर साज सज्जाकर सुंदर सिंहासन रखकर श्री रघुनाथजी और माता कौशल्या जी की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिपदा से नवमी तक नित्य दोनों समय श्रीराम और माता कौशल्याजी का पूजन, भोग, आरती, अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें और भगवान श्रीराम के सुंदर चरित्र का नित्य पाठ कर वाद्ययंत्रों पर भजन-कीर्तन और नृत्य करें। नवमी के दिन माता कौशल्या सहित श्रीराम का विशेष षोडसोपचार या पंचोपचार पूजन कर पुत्रवान ब्राह्मण और पुत्रवती स्त्रियों का पूजन कर उन्हें वस्त्र अलंकार प्रदान कर भोजन कराएं।
चैत्र स्नान, दान, हवन पूजन से मिलता है पुण्य
भगवान श्रीराम के प्राकट्य के समय विश्व में आनंद छा गया था। देवी-देवताओं ने दुन्दुभी बजाकर पुष्प वर्षा की थी। उनकी स्तुतियाें से प्रसन्न होकर श्रीराम ने देवताओं से कहा कि बैशाख से कार्तिक श्रेष्ठ, कार्तिक से माघ, माघ से भी चैत्र मास श्रेष्ठ होगा। चैत्र में किया गया स्नान, दान, हवन करोड़ गुना फल देगा और अयोध्या में तो उससे भी अधिक फल प्रदान करेगा।
28 को होगा श्रीराम प्राकट्य उत्सव
चीनी मिल स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में श्रीराम जन्मोत्सव 28 मार्च को दोपहर 12 बजे होगा। मंदिर के पुजारी पं दयानंद पांडे ने बताया कि भगवान का पूजन, आरती के बाद भंडारे में भक्तों को प्रसाद वितरण किया जाएगा।