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पावर कॉरपोरेशन वालों की मेहबानी से पुलिस वाले कर रहे बिजली की चोरी

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धौरहरा/लखीमपुर खीरी। पावर कॉरपोरेशन के भी खेल निराले हैं। एक तरफ कॉरपोरेशन इंजीनियर बिजली चोरी रोकने के लिए कनेक्शन काटने से लेकर बिजली कटौती कर रहा है, वहीं दूसरी ओर धरौहरा कोतवाली समेत सरकारी संस्थानों में इंजीनियर सब कुछ जानते हुए भी गरीबी की रेखा से नीचे पात्र माने जाने वाले कम किलोवाट के घरेलू कनेक्शन देकर हर महीने लाखों की बिजली चोरी करा रहे हैं। बिल आता है तीन सौ-चार सौ रुपये।
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यह हाल ज्यादातर थाने चौकियों का है। फिलहाल धौरहरा कोतवाली को ही लीजिए। कोतवाली परिसर में हालनुमा दफ्तर समेत 40 कमरे बने हैं। फिर भी कोतवाली में वर्षों से केवल एक किलोवाट की क्षमता का कनेक्शन है। यह कनेक्शन गरीबी की रेखा से नीचे वाले परिवारों को दिया जाता है। पावर कॉरपोरेशन के हिसाब से धौरहरा कोतवाली फिलहाल गरीबी की रेखा वालों का घर है। कोतवाली की बिल्डिंग को देखते हुए यहां कम से कम 10 से 15 किलोवाट का कनेक्शन होना चाहिए।
नगर क्षेत्र में सबसे छोटा घरेलू कनेक्शन दो किलोवाट का दिया जाता है। उससे नीचे एक किलोवाट का कनेक्शन बीपीएल श्रेणी में आता है। ग्रामीण क्षेत्र में बीपीएल कार्डधारकों का घरेलू कनेक्शन एक किलोवाट क्षमता का हैै। सरकारी दफ्तरों में ज्यादातर कनेक्शन कामर्शियल श्रेणी के हैं। इनकी क्षमता कम से कम पांच किलोवाट की रहती है। यदि किसी घर में एयर कंडीशन (एसी) लगा हैै, तो उसमें चार किलोवाट से कनेक्शन शुरू होता है। फिर जितने एसी होते हैं, उसी हिसाब से कनेक्शन का लोड बढ़ता जाता है। क्योंकि एक एसी की क्षमता ही ढाई किलोवाट होती है। धौरहरा कोतवाली में वर्षों से एक किलोवाट का बिजली कनेक्शन होने के कारण बिजली का बिल नाम मात्र का ही आता है। बीते अगस्त महीने का ही बिल करीब तीन सौ रुपये का आया। इससे पावर कॉरपोरेशन को हर महीने लाखों की चपत लगती है। कम किलोवाट कनेक्शन की बात पॉवर कारपोरेशन के इंजीनियर भी जानते हैं, लेकिन कभी किसी ने पुलिस के डर से कोतवाली में कनेक्शन की क्षमता बढ़ाने की कोशिश नहीं की। इसलिए वर्षों से यह कोतवाली मात्र एक किलोवाट के कनेक्शन पर चल रही है। बिल इतना कम होने के बावजूद वह भी जमा नहीं हो रहा, कई महीनों का बकाया होते हुए रकम करीब 33 हजार पहुंच गई है।
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36 साल में कार्पोरेशन को करोड़ों का चूना
धौरहरा कोतवाली में बिजली कनेक्शन 20 फरवरी 1983 को चालू हुआ था। तब से 36 साल बीत गए, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने लोड बढ़ाने का ध्यान नहीं दिया। एक किलोवाट क्षमता ही बरकरार हैै। 36 सालों में यह रकम करोड़ों में पहुंच गई है।
कोतवाली में बिजली कनेक्शन एक किलोवाट का काफी समय से चल रहा है। वर्तमान में यहां पर ज्यादा बिजली खपत की जानकारी मिली है। खपत के हिसाब से कोतवाली में कनेक्शन लोड की क्षमता बढ़वाई जाएगी। -रवी कुमार, एसडीओ, धौरहरा
कोतवाली का कनेक्शन काफी पुराना है। अब लोड कुछ बढ़ा हो सकता है। मीटर के हिसाब से बिल का भुगतान किया जा रहा है। अभी मुझे पता नहीं कितना बिजली बिल बाकी है। -अजय प्रकाश मिश्रा, प्रभारी निरीक्षक
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