फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पॉलीथिन के खतरे बड़े फिर भी इस्तेमाल से करते नहीं गुरेज

Wed, 05 Aug 2015 06:09 PM IST
लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर पालिका ने शहर को पॉलीथिन मुक्त बनाने की मुहिम तो शुरू कर दी लेकिन इस मुहिम की कामयाबी में अभी तमाम दुश्वारियां हैं। पॉलीथिन के दुष्प्रभावों को जानते हुए भी सहज इस्तेमाल के कारण लोग इसका मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। राशन और सब्जियां तो लाने में लोग पॉलीथिन का प्रयोग कर ही रहे हैं। सबसे खतरनाक स्थिति तो यह है कि लोग गर्म दूध और खाने पीने की गर्म चीजें भी घर ले जाने में भी पॉलीथिन के इस्तेमाल में गुरेज नहीं करते हैं।
विज्ञापन

शहर को पॉलीथिन मुक्त करने के लिए कई बार जागरूकता अभियान चलाए गए लेकिन कामयाब नहीं हो सके। पहली बार सरकारी स्तर पर नगर पालिका ने अभियान शुरू किया है तो लोगों को इसकी कामयाबी की उम्मीद बंधी है। व्यापारी नेता अशोक गुप्ता ने नगर पालिका के इस प्रयास की सराहना की है। उनका कहना है कि लोगों को पॉलीथिन के विकल्पों के बारे में पहले से जागरूक किया जाना चाहिए। व्यापारी नेता राकेश मिश्र ने कहा कि व्यापारियों के साथ ग्राहकों को भी पॉलीथिन का मोह छोड़ना होगा।
समाजसेवी डॉ. उमा कटियार का कहना है कि नगर पालिका की पॉलीथिन मुक्त शहर बनाने की पहल स्वागतयोग्य है। पॉलीथिन की जगह दूसरे विकल्प अपनाने में कुछ आर्थिक बोझ बढ़ सकता है लेकिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है। दुकानदार श्याम बिहारी का कहना है कि पॉलीथिन का प्रयोग दुकानदारों के लिए जितना आसान है ग्राहकों के लिए भी उतना ही सहज है लेकिन शहर की सेहत के लिए इसका इस्तेमाल बंद होना ही चाहिए।
विज्ञापन

अध्यक्ष नगर पालिका लखीमपुर खीरी डॉ. इरा श्रीवास्तव ने बताया कि पॉलीथिन के दुष्प्रभावों के मद्देनजर नगर पालिका ने शहर को पॉलीथिन मुक्त बनाने के लिए मुहिम शुरू की है। इसके लिए जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। 15 अगस्त से शहर में पॉलीथिन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इस काम में शहर की जनता का सहयोग बेहद जरूरी है।
प्रतिदिन शहर में करीब सात क्विंटल खपती है पॉलीथिन
एक अनुमान के मुताबिक शहर में प्रतिदिन सात से आठ क्विंटल पॉलीथिन थैलियों की खपत होती है। त्योहारों के मौसम में यह खपत और ज्यादा बढ़ जाती है। इन दिनों पॉलीथिन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल सब्जियों और खाने पीने की चीजें ले जाने में हो रहा है जो सेहत के लिए सबसे ज्यादा घातक है।
पॉलीथिन से प्रत्यक्ष में पैदा हो रही यह दुश्वारियां
-इस्तेमाल के बाद पॉलीथिन सड़कों पर फेंक दी जाती हैं जो उड़कर नालियों में पहुंच जाती हैं और नालियों को चोक कर देती हैं
-खाने पीने की चीजें लाने में इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन जब बाहर फेंकी जाती हैं तो उनमें लगे खाद्य पदार्थों के साथ आवारा घूमने वाली गायें इन पॉलीथिन थैलियों को खा जाते हैं जिससे अक्सर गायों की मौत हो जाती है।
-कचरे के साथ पॉलीथिन जमीन में जाकर भूमि को बंजर बना देती है।
इंसानी सेहत के लिए बेहद घातक है पॉलीथिन
जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक डॉ. अनिल सिंह का कहना है कि पॉलीथिन पर्यावरण और सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। इसका 500 साल तक विघटन नहीं होता। इसके जलने से निकलने वाली जहरीली गैस हीमोग्लोबिन में घुल कर लोगों में जानलेवा बीमारियां पैदा करती हैं। गर्म चाय और गर्म दूध लाने से पॉलीथिन का जहरीला पदार्थ उनमें आ जाता है जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। उधर पशु चिकित्साधिकारी रविकांत का कहना है कि अक्सर जानवर पॉलीथिन खा जाते हैं जो आंतों के रियूमेन में जाकर फंस जाती है जिससे पशुओं की पाचन क्रिया ध्वस्त हो जाती है। इससे मवेशी की मौत तक हो जाती है। 
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें