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सावधान! कोहरा नहीं चिमनियों का काला धुआं बना है धुंध

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पड़रिया तुला-पलिया रोड पर छाई धुंध। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जनपद में सुबह कोहरे की धुंध छाने लगी है। गन्ने का पेराई सीजन प्रारंभ होने से सैकड़ों की संख्या में गन्ना कोल्हु चालू हो गए हैं, तो वहीं खांडसारी इकाइयां भी शुरू हो गई हैं। इनकी चिमनियों से निकलने वाला काला धुआं ही पर्यावरण में घुलकर प्रदूषण की रफ्तार को बढ़ा रहा है, साथ ही कोहरे की धुंध के रूप में छा रहा है।
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आने वाले दिनों में करीब 20 खांडसारी इकाइयां और नौ चीनी मिले भी पेराई प्रारंभ करेंगी। वहीं जनपद में ईंट भट्ठों की संख्या भी करीब 200 है। इससे प्रदूषण की मार और बढ़ना तय है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अभी जनपद में वायु प्रदूषण मापक यंत्र नहीं लगाए हैं, जिससे एअर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) की जानकारी नहीं हो पाती है। हालांकि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चार जगहों पर वायु प्रदूषण मापक यंत्र लगे हैं, जहां सोमवार को एअर क्वालिटी इंडेक्स पर पीएम-10 का स्तर 401 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहा है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि लखीमपुर में भी करीब 300 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा एक्यूआई होगा।
करीब 120 किमी लंबी इंडो-नेपाल सीमा होने के साथ ही जनपद में प्रदेश का एकलौता दुधवा नेशनल पार्क स्थित है। प्राकृतिक संसाधनों में घनी होने के कारण जनपद में वायु प्रदूषण के खतरे को लेकर अब तक सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई ध्यान नहीं दिया है। न ही प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कोई कार्ययोजना बनाई गई है। अभी सब कुछ रामभरोसे ही चल रहा है, जबकि जनपद में गन्ना कोल्हु कुटीर उद्योग के रूप में फलफूल रहे हैं। इन पर सरकार का कोई नियंत्रण भी नहीं है और न ही इन पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक प्रभावी होते हैं। कोल्हु का संचालन सीधे किसानों और मजदूरों से जुड़ा होने के कारण अधिकारी भी इस मामले से दूरी बनाए हुए हैं। जबकि कोल्हू संचालकों ने चिमनियां काफी छोटी बना रखी हैं, जिससे निकलने वाला काला धुआं वायुमंडल को जहरीला बना रहा है। जनपद में करीब दो हजार गन्ना कोल्हु लगे हैं, जिनमें करीब 50 फीसदी का संचालन होने लगा है। कुछ दिनों बाद सभी कोल्हु चालू हो जाएंगे। तब वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर और खतरनाक हो जाएगा। वहीं एनजीटी की सख्ती के बाद प्रशासन ने गांव-गांव किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया है, तब से पराली जलाने के मामलों में काफी कमी आई है।
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सोमवार की सुबह लखीमपुर-पलिया मार्ग पर पड़रिया तुला क्षेत्र में धुंध छाई रही, जिससे लोगों को कोहरा गिरने का अहसास हुआ। हालांकि अभी सर्दी इतनी नहीं बढ़ी है कि कोहरा गिरने लगे। जानकारों का कहना है कि वाहनों का धुआं, कोल्हु से निकलने वाला धुआं और पराली-कूड़ा जलाने से उत्पन्न धुआं वातावरण में मौजूद रहता है, जो सुबह-शाम के वक्त सफेद धुएं की चादर की तरह छा जाता है। वातावरण में नमी मौजूद रहने और तापमान कम रहने से ऐसा होता है।
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प्रदूषण से बढ़े अस्थमा, एलर्जी के मरीज
डॉ आईके रामचंदानी ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण से अस्थमा, दमा और ब्रेन हेमरेज के मरीज बढ़ रहे हैं। धुएं से आंखों में एलर्जी के मामले बढ़े हैं।
प्रदेश के 16 बड़े शहरों में वायु प्रदूषण मापक यंत्र लगाए गए हैं। अभी लखीमपुर में प्रदूषण मापक यंत्र नहीं लगे हैं। नजदीकी जनपदों में सिर्फ लखनऊ में ही चार स्थानों पर प्रदूषण मापक यंत्र लगे हैं। किसानों से जुड़ा कुटीर उद्योग होने के कारण कोल्हु संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कोल्हु में चिमनियां काफी नीची हैं, जिसकी ऊंचाई बढ़ाकर प्रदूषण का स्तर कम किया जा सकता है। ईंट भट्ठों, खांडसारी इकाइयों और चीनी मिलों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक के मुताबिक ही चिमनियां बनी हैं।
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-डॉ रामकरन, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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