अपराध पर रहे काबू इसलिए पुलिस करती है टोटका
लखीमपुर खीरी। जैसे आम लोग किसी काम की शुरुआत शुभ व शगुन के साथ करते हैं, वैसे ही पुलिस भी नए साल की शुरुआत करती है। यही कारण है कि पुलिस साल के पहले दिन आईपीसी की धारा में रिपोर्ट दर्ज करने से बचती है। पुलिस निरोधात्मक कार्रवाई से जीडी की शुरुआत करती है।
नए साल के पहले दिन लोग ऐसा कोई काम करने से बचते हैं, जिससे उनका साल खराब न हो। हर कोई शुभ व शगुन में काम की शुरुआत करता है। पुलिस भी इस काम में पीछे नहीं है। खासतौर पर पुलिस साल के पहले दिन कई टोटके अजमाती है, जिससे अपराध पर अंकुश लगे। उसकी नौकरी आसानी से चलती रहे। नाम न छापने की शर्त पर एक सीओ स्तर के अधिकारी ने बताया कि पुलिस साल के पहले दिन किसी घटना की रिपोर्ट आईपीसी की धाराओं में दर्ज करने से परहेज करती है। इसलिए वह जीडी की शुरुआत गैंगस्टर, शस्त्र अधिनियम, आबकारी अधिनियम, सीआरपीसी की धारा 110 जैसी निरोधात्मक कार्रवाई, गुंडा एक्ट, एमवी एक्ट जैसी उपलब्धि से जीडी की अपराध संख्या एक पर दर्ज कर शुरुआत करती है।
विषम संख्या से करती है परहेज
पुलिस विषम क्रम वाली संख्या जैसे तीन, तेरह, तेइस में रवानगी से बचती है। आठ, 18 और 28 रपट नंबर पर आमद दर्ज कराने से परहेज करती है। इन टोटकों को अजमाने के पीछे भले ही कोई पुख्ता आधार न हो, लेकिन अशुभ मानकर पुलिस इसे दशकों से अजमा रही है। यही वजह है कि आईपीसी की धारा का जीडी के क्रम संख्या एक पर इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
शस्त्र अधिनियम से हुई जीडी की शुरुआत
सदर कोतवाली पुलिस ने जीडी की शुरुआत शस्त्र अधिनियम का मामला दर्ज कर शुरुआत की। यह मामला चौकी इंचार्ज महेवागंज पारसन नाथ यादव की ओर से दर्ज कराया गया है। चौकी इंचार्ज पारस नाथ यादव के मुताबिक वह मंगलवार की रात भीरा रोड से गश्त कर ज्ञानपुर जा रहे थे। दावा है कि पुलिस ने महेवा मोड़ के पास मोहम्मदीन निवासी महेवा को तमंचा के साथ गिरफ्तार किया।