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हरियाली वाले जिले में घुल रहा प्रदूषण का जहर

Mon, 05 Jun 2017 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो  लखीमपुर खीरी।
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पर्यावरण दिवस पर विशेष: - फोटो : अमर उजाला
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कूड़े कचरे से पट रहे तालाब और नदियां
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देखरेख के अभाव में बर्बाद हो गया पौधरोपण
 खीरी जिला पर्यावरण के लिहाज से संपन्न है। वजह है 7680 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस जिले में 1735 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हरे-भरे जंगलों से परिपूर्ण है, लेकिन कट रहे हरे भरे बागों, दौड़ते वाहन और जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पर्यावरण में जहर घोला जा रहा है। इतना ही नहीं प्रदूषित जल, सड़ांध फैलाते कूड़ा करकट के ढेर, अस्पतालों और कारखानों से निकलने वाला कचरा, वाहनों से निकलता जहरीला धुआं, पॉलीथिन का बढ़ता इस्तेमाल और लगातार कम होती हरियाली वातावरण में जहर जो घोल रहे हैं। वहीं जिले में रिकार्ड पौधरोपण कराया गया, लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे नहीं चले। नतीजतन पौधरोपण बर्बाद हो गया। अगर यूं ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचता रहे तो वह वक्त ज्यादा दूर नहीं है जब सांस लेने के लिए शुद्ध हवा भी न मिलेगी। हकीकत यह है कि पर्यावरण दिवस जैसे मौकों पर कुछ संस्थाएं और वन विभाग जागरूकता के लिए कार्यक्रम कर इतिश्री कर लेते हैं, जबकि स्वार्थवश पेड़ों पर कुल्हाड़ी की बेरहम धार सितम ढा रही है तो तालाबों से लेकर नदियों तक में कूड़ा कचरा डालकर पर्यावरण से खिलवाड़ किया जा रहा है, वहीं आधुनिकता की दौड़ और मुनाफे की बढ़ती ललक से रसायनों का बढ़ता इस्तेमाल पानी और हवा को दूषित कर रहा है।
 
शहर से सटी नदी में कूड़ा-कचरा
शहर से सटी उल्ल नदी में घरों का कूड़ा-कचरा फेंका जा रहा है। आलम यह है कि यह नदी कचरे का ढेर बन गई है। इसमें नहाना तो दूर लोगबाग अब इसका पानी छूना तक नहीं पसंद करते।
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रजागंज में हो रहा हरे-भरे बागों का सफाया
रजागंज इलाके में हरे-भरे बागों का सफाया हो रहा है। बानगी के तौर पर वन रेंज महेशपुर मोहम्मदी की बिलहरी बीट की इस बाग में आम, गूलर और शीशम के पेड़ों पर आरा चलाकर सफाया कर दिया गया।
 
पौधरोपण हुआ पर नहीं चला एक पौधा
सेमरई वेटलैंड की इस जमीन पर वन विभाग ने वर्ष 2014-15 में पौधरोपण कराया था, लेकिन देखरेख के अभाव में यहां अब एक भी पौधा नहीं है। झाड़ियां उग आई हैं।
 
वन विभाग की लापरवाही दर्शाता टूटा ट्री गार्ड
पलिया इलाके में पौधों को बचाने के लिए वन विभाग ने सड़कों के किनारे ट्री गार्ड लगवाए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में कुछ दिनों में ही यह टूट गए। लोगबाग इनकी ईंटें तक उठा ले गए। 
 
एक नजर इधर भी
वाहनों के साइलेंसरों और कारखानों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण फैलाने में सबसे बड़ा मददगार है। डीजल से संचालित होने वाले वाहनों में मानक के अनुरूप कार्बन डाई आक्साइड की अधिकतम मात्रा 65 हार्टिजेड यूनिट होनी चाहिए। पेट्रोल से चलने वाले वाहनों में लैड की मात्रा अधिकतम तीन से 4.5 प्रतिशत तक होना मानक के अंदर माना जाता है। हकीकत के पैमाने पर सैकड़ों वाहन खरे नहीं हैं। जबकि उन्हें प्रदूषण नियंत्रण के प्रमाण पत्र आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। 
 
यह हैं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम
किसी भी प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाई को आबादी क्षेत्र में चलाने की अनुमति नहीं है। जिस उद्योग-व्यावसाय से खनिज तेल को तेज ताप पर गर्म किया जाता है उस उद्योग को भी आबादी में संचालित नहीं किया जा सकता। नियमों का पालन न करने पर एक लाख का जुर्माना और पांच वर्ष तक कारावास का भी प्रावधान है।
 
अंकुश बिना संरक्षण महज कोरी कल्पना
कूड़े के ढेर और पॉलीथिन जलाने से वातावरण में कार्बन डाई आक्साइड, मोनोआक्साइड, मिथेन, सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन जैसी घातक गैसों का उत्सर्जन होता है। यह गैसें सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह हैं। इन पर प्रभावी अंकुश के बिना पर्यावरण संरक्षण महज कोरी कल्पना है। 
- डॉ. अनिल कुमार, समन्वयक, राष्ट्रीय बाल विज्ञान
 
मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक
प्रदूषण फैलाने वाली कोई भी इकाई या संयंत्र मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं। हानिकारक गैसों का उत्सर्जन ग्लोबल वर्मिंग बढ़ाता है। कार्निया, आंखों का अल्सर, सांस की नली में सूजन बढ़ जाती है। स्किन एलर्जी, कैंसर, हृदयघात, दमा, एलर्जी, ब्रेनहेमरेज में भी इजाफा हो रहा है। 
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- डॉ. मोहित तिवारी, फिजीशियन, जिला अस्पताल
 

डिप्टी सीएमओ ने घर के आंगन में बना दिया बगीचा
गोला गोकर्णनाथ। पर्यावरण को लेकर जहां लोगबाग लापरवाह होकर हरे भरे पेड़ तक काट डालते हैं, वहीं राघवकुंज निवासी डिप्टी सीएमओ रवींद्रनाथ वर्मा ने अपने घर के आधे से ज्यादा हिस्से को उद्यान में परिवर्तित कर रखा है। डॉ. रवींद्रनाथ वर्मा बताते हैं कि वर्ष 1976 में उन्हें पर्यावरण पर आधारित मानव और वातावरण मॉडल के लिए तत्कालीन राज्यपाल एम चेन्ना रेड्डी ने उन्हें गोल्ड मेडल और प्रमाणपत्र से सम्मानित किया था। तभी से उनके मन में प्रेरणा जाग्रत हुई कि उनका पर्यावरण प्रेम प्रमाणपत्र तक ही सीमित न रह जाए, इसलिए उन्होंने पर्यावरण की दिशा में काम करना शुरू किया। वर्ष 2008 में खुटार रोड स्थित कुंवरपुर गांव में छह बीघा जमीन पर चार हजार फल, फूल, औषधि के पौधे रोपित किए। जिसे उन्होंने आत्म चेतना केंद्र का नाम दिया। जिसका उद्घाटन कबीरधाम के क्षमा साहेब और तत्कालीन कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू ने किया था।
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