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Kavya Cafe: 'सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए', अमर उजाला के काव्य कैफे में कवियों ने बांधा समां

Wed, 30 Apr 2025 03:21 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

अमर उजाला के काव्य कैफे कार्यक्रम में नामचीन कवियों ने अपनी की रचानाओं से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। कवियों ने अपनी वाणी से श्रोताओं को झूमने व हंसने को मजबूर कर दिया।
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काव्य कैफे कार्यक्रम में कविता सुनातीं कवयित्री - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी में अमर उजाला की ओर से शहर के होटल इलीट इन में मंगलवार की शाम काव्य कैफे का आयोजन किया गया। काव्य कैफे में नामचीन कवियों ने अपनी की रचानाओं से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। कवियों ने अपनी वाणी से श्रोताओं को झूमने व हंसने को मजबूर कर दिया। शृंगार, वीर रस की कविताओं पर कवियों ने खूब वाहवाही लूटी। हास्य कवियों ने श्रोताओं को खूब हंसाया और गुदगुदाया।

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मुख्य अतिथि डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल, विशिष्ट अतिथि एसपी संकल्प शर्मा व गोला गोकर्णनाथ नगर पालिका परिषद अध्यक्ष वजिय शुक्ला रिंकू ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुंभारभ किया। इसके बाद कवयित्री मणिका दुबे ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का आगे बढ़ाया। मंच संचालन का जिम्मा शृंगार रस के कवि स्वयं श्रीवास्तव ने संभाला। सबसे पहले उन्होंने बाराबंकी के हास्य कवि विकास बौखल को मंच पर आमंत्रित किया। विकास बौखल ने पहले तो श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और हंसाया। इसके बाद कविता पढ़ी, किसी खंजर से न तलवार से जोड़ा जाए ... सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए। 

लखीमपुर के शृंगार रस के कवि नवल सुधांशु ने कहा कि एक दिन एक दिये ने कहा मन पतंगा सा कोई नहीं, तप भगीरथ सा कोई नहीं, जल भी गंगा सा कोई नहीं। झूमते बादलों ने कहा इंद्र धनुषों का भ्रम मिट गया, रंग सारे मिले हर जगह पर तिरंगे सा कोई नहीं।
 
जनपद बहराइच में पुलिस इंस्पेक्टर व कवि धर्मराज कवि शायर ने अपनी कविता के माध्यम से एक सच्चे पत्रकार के चित्रण को दिखाया और सुनाया। कहा, मुझे न तीर न तलवार की जरूरत है, सच को कहने को बस अखबार की जरूरत है। तख्तोताज की कोई नहीं ख्वाहिश मुझको, कलम में सिर्फ मुझे धार की जरूरत है। 

'यहां तुम हो मगर तन्हाईयां हैं'
मध्य प्रदेश की कवयित्री मणिका दुबे ने कहा कि शहर के शोर में वीरानियां हैं, यहां तुम हो मगर तन्हाईयां हैं। मोती तुम्हारे हाथ से आकर फिसल गया, तुम सोचते हो पांव का काटा निकल गया। ऐसा हमारा दिल था इसलिए सह गई... अब कभी न मिलें वो हमें, आप इतनी दुआ कीजिए प्यार अंदर नहीं आपके, तो ख़तम ये दिखावा करें। दोस्ती का तमाशा नहीं दुश्मनी अब अता कीजिए। 

...जो दिख रही है खून पसीने की चमक है
मध्य प्रदेश से ही आए कवि रवि शंकर चतुर्वेदी ने हास्य कविता से श्रोताओं को हंसाने के बाद कहा, सारे गम को निचोड़ देता है, अहम के शैल फोड़ देता है। लेखनी का समर्थ से संवाहक, वक्त के पांव मोड़ देता है। अंत में संचालक व श्रृंगार रस कवि स्वयं श्रीवास्तव ने कहा, पत्थर की चमक है न नगीने की चमक है, चेहरे पे सीना तान के जीने की चमक है। पुरखों से विरासत में हमें कुछ न मिला था, जो दिख रही है खून पसीने की चमक है।
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इससे पहले कार्यक्रम में इस आयोजन में अमर उजाला के सहयोगी जेटीसी परिवार के इंद्रेश गुप्ता, स्पंदन नर्सिंग होम के डॉ. अंजित सिंह, चन्दरानी हॉस्पिटल के संचालक डॉ. धीरेंद्र वर्मा, अजमानी पब्लिक स्कूल की एमडी गुरजीत कौर अजमानी, सनशाइन हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर की संचालक डॉ. कौशल वर्मा के प्रतिनिधि   अनुज सिंह और डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी का डीएम व एसपी ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
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