दुधवा के जंगल में विचरण करते हिरन
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के बाहर बाघ और तेंदुओं की भूख-प्यास से मौत वन विभाग के लिए चिंता का कारण बन गई है। अफसरों का दावा है कि रिजर्व की खाद्य शृंखला काफी समृद्ध है। यहां जानवरों के लिए बनाए गए जलाशयों में पानी भी भरपूर है। बावजूद इसके बाघ और तेंदुए शिकार के लिए जंगल के बाहर इंसानी आबादी की ओर बढ़ रहे हैं। जानकार इसके पीछे इलाके की जंग और इसके लिए होने वाले आपसी संघर्ष को वजह बता रहे हैं।
हाल ही में दुधवा टाइगर रिजर्व की मैलानी रेंज से सटे रामपुर ढखैया गांव में बाघिन की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि बाघिन ने कई दिनों से कुछ खाया-पिया नहीं था। उसकी आंतें सूख गई थीं। इसके बाद दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला रेंज की रायपुर बीट के गदियाना गांव में मृत मिला तेंदुआ भी खाली पेट पाया गया था। रामपुर ढखैया गांव में मरी बाघिन पहले से बीमार बताई गई थी। उसके दांत टूटे हुए थे और पंजे भी जख्मी थे। गोला रेंज के गदियाना गांव में मरा तेंदुआ आपसी संघर्ष में इस कदर घायल था कि वह शिकार करने में अक्षम था।
जंगल में शिकार भी भरपूर
दुधवा टाइगर रिजर्व में 21 फीसदी घास के मैदान हैं जिसके चलते पांच प्रजातियों के हिरनों, जंगली सुअरों और नीलगायों की संख्या भी पर्याप्त है। वर्ष 2022 में हुई शाकाहारी पशुओं की गणना में इसकी पुष्टि हुई है।
पाढ़ा हिरन - 3169
वनरोज - 4454
सांभर - 318
चीतल - 22408
बारासिंहा - 3691
काकड़ - 1284
सुअर - 11411
वनगाय - 1510
पानी भी कम नहीं
दुधवा में शारदा, सुहेली, घाघरा, उल्ल, मोहाना, गेरूआ नदियों के अलावा 10 छोटे-बडे नाले हैं। आधा दर्जन झीलें और 50 से अधिक छोटे बड़े तालाब हैं। इसके अलावा 200 वाटरहोल्स बनाए गए हैं, जिनमें समय-समय पर पानी भरा जाता है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में खाद्य शृंखला काफी समृद्ध है। यहां भोजन पानी की भी कमी नहीं है। बाघ और तेंदुओं के लिए पर्याप्त संख्या में शाकाहारी पशु हैं। मौत के बाद जिन बाघ और तेंदुओं का पेट खाली पाया गया है वह वास्तव में बीमार या घायल थे जिससे शिकार नहीं कर पा रहे थे। - बी प्रभाकर, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व