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तराई में लोकप्रिय हो रही खबहा की खेती

Sat, 07 Mar 2015 05:18 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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पिछले चार साल से गन्ना मूल्य भुगतान की समस्या से जूझ रहे किसानों ने गन्ने का विकल्प तलाश करना शुरू कर दिया है। इधर पेठा बनाने में इस्तेमाल होने वाले खबहा का उत्पादन कर किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। धौरहरा, ईसानगर और रमियाबेहड़ ब्लाकों में खबहा की खेती काफी लोकप्रिय हो रही है। कम समय में उपज तैयार होने और लागत से चार गुना मुनाफा होने से किसान इसे अपना रहे हैं।
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स्वादिष्ट पेठा बनाने में इस्तेमाल होने वाला खबहा किसानों की अर्थव्यवस्था में मिठास घोल रहा है। तराई में गन्ना मूल्य भुगतान में आ रही दिक्कतों से परेशान किसान नगदी फसल की वैकल्पिक खेती के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। केला, मशरूम, स्ट्राबेरी और औषधीय खेती के बाद जिले में बड़े पैमाने पर खबहा की खेती शुरू हुई है। अकेले धौरहरा तहसील के तीन ब्लाकों ईसानगर, रमियाबेहड़ और धौरहरा की दस हजार एकड़ से ज्यादा भूमि पर खबहा की खेती शुरू हो चुकी है।
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100 दिन में तैयार होती है खबहा की फसल
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहैल बताते हैं कि खबहा की पैदावार हर तरह की मिट्टी में हो जाती है। दोमट मिट्टी में खबहा की उपज अच्छी होती है। खबहा की उपज एक साल में दो बार ली जा सकती है। यह फसल 100 दिन में तैयार हो जाती है। एक साल में इसकी फसल दो बार ली जा सकती है। पहली बुवाई फरवरी-मार्च माह में होती है दूसरी बुवाई जुलाई-अगस्त में की जाती है।
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एक एकड़ में लागत 10000 पैदावार 40000 की
खबहा उत्पादन के लिए खेत तैयार करने से बुवाई और सिंचाई तक करीब 10 हजार रुपया प्रति एकड़ की लागत आती है। एक एकड़ में आठ से 10 टन की उपज होती है। बाजार में यह 4000 रुपया प्रति टन की दर से आसानी से बिक जाता है। एक एकड़ में करीब 40000 रुपये की राशि हाथ आती है। इस तरह लागत से चार गुना अधिक उत्पादन होता है।
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मंडियों में है खबहा की बेहद मांग
खबहा की खेती करने वाले किसान राजेंद्र बताते हैं कि पेठा बनाने में इस्तेमाल होने वाले खबहा की आगरा, कानपुर और बरेली की मंडियों में बेहद मांग है। उत्पादन की जानकारी होने पर व्यापारी किसानों से खुद संपर्क कर फसल तैयार होने के पहले ही माल बुक कर लेते हैं। फसल तैयार होने पर किसान व्यापारी के पास ट्रकों से माल भेज देते हैं। किसानों को उपज का मूल्य नगद मिल जाता है।
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