लखीमपुर खीरी। प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) में रविवार को अभ्यर्थियों ने सवालों से जूझकर अपनी तैयारी परखी, लेकिन परीक्षा के बाद घर लौटने की जद्दोजहद ने उनके धैर्य की परीक्षा ली। दूसरी पाली की परीक्षा छूटते ही रोडवेज बस अड्डे पर यात्रियों का हुजूम उमड़ पड़ा।
बसों के इंतजार में अभ्यर्थियों और उनके साथ आए परिजनों को एक से डेढ़ घंटे तक रुकना पड़ा। रेलवे स्टेशन पर भी ट्रेनों में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की हुई। उधर, शाम को शहर के प्रमुख चौराहे जाम की चपेट में आ गए। परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों के लिए घर पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहा।
जिले में पीईटी के लिए 25 केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा में 14,299 अभ्यर्थी शामिल हुए। दूसरे जिलों से आए अभ्यर्थियों के साथ हजारों की संख्या में उनके अभिभावक भी पहुंचे थे। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए लखीमपुर डिपो ने अपनी 100 बसें लगाई थीं। इसके अलावा गोला से 50 अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई थी। प्रति बस 50 सीट के हिसाब से कुल 7,500 सीटें थीं। इसके बावजूद शाम को एक साथ यात्रियों की भीड़ उमड़ने से बसों की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया।
पहली पाली की परीक्षा छूटने के बाद लखीमपुर से लखनऊ मार्ग पर 70 और बलरामपुर मार्ग पर आठ रोडवेज बसें भेजी गई थीं। इनमें से अधिकांश बसें दूसरी पाली की परीक्षा छूटने तक वापस नहीं आ सकीं। इससे शाम को बसों की किल्लत जैसी स्थिति बन गई। बस अड्डे पर पहुंचते ही यात्रियों में चढ़ने की होड़ लग जाती। बसों के लिए इंतजार कर रहे अभ्यर्थी बार-बार आने वाली बसों की ओर दौड़ते नजर आए।
हालांकि, एआरएम ने सीतापुर डिपो से कुछ अनुबंधित बसों की व्यवस्था कराई। लखनऊ मार्ग की बसें शाम छह से सात बजे तक लौटने लगीं, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिली। बलरामपुर मार्ग पर भेजी गई बसें रात तक नहीं लौटी थीं। बसों की वापसी के साथ यात्रियों को धीरे-धीरे रवाना किया गया।
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निर्माणाधीन बस अड्डे ने बढ़ाई परेशानी
रोडवेज बस अड्डा निर्माणाधीन होने के कारण परिसर में बसों को खड़ा करने और यात्रियों को चढ़ाने-उतारने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में बसों को सड़क किनारे ही यात्रियों को उतारना और चढ़ाना पड़ा। इससे बस चालकों के साथ यात्रियों को भी परेशानी हुई। पहली पाली में बसों की व्यवस्था देखने के लिए हरदोई डिपो के आरएम गौरव वर्मा भी लखीमपुर पहुंचे थे।
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बसें कम नहीं पड़ीं, बल्कि पर्याप्त थीं। पहली पाली में 15 बसें खड़ी रह गई थीं। शाम की पाली में भीड़ बढ़ी, लेकिन सभी को बसें उपलब्ध कराई गईं। वह खुद पूरे दिन रोडवेज परिसर में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही थीं।
-गीता सिंह, एआरएम लखीमपुर डिपो
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ट्रेनों में धक्का-मुक्की, कई यात्रियों की छूटी ट्रेन
पहली पाली की परीक्षा छूटने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रेलवे स्टेशन पहुंचे। मैलानी की ओर से लखनऊ जाने वाली पैसेंजर ट्रेन करीब दो बजे लखीमपुर स्टेशन पहुंची तो यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी। कोई खिड़की से घुसने की कोशिश करता नजर आया तो किसी को धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। भीड़ अधिक होने के कारण कई महिला यात्रियों को ट्रेन छोड़नी पड़ी। बाद में वे रोडवेज बसों से रवाना हुईं। अभ्यर्थियों की भीड़ को देखते हुए निजी बसों का संचालन भी बढ़ा।
ई-रिक्शा चालकों ने वसूला मनमाना किराया
पहली पाली के बाद भीड़ के बावजूद यातायात सामान्य रहा, लेकिन शाम पांच बजे दूसरी पाली की परीक्षा छूटने के बाद स्थिति बिगड़ गई। रोडवेज, गांधी विद्यालय चौराहा, राजापुर चौराहा, रेलवे स्टेशन, संकटादेवी चौराहा और श्रीकृष्णा टॉकीज के आसपास जाम लग गया। अभ्यर्थियों के साथ राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ी।
भीड़ के बीच ई-रिक्शा चालकों पर मनमाना किराया वसूलने के आरोप भी लगे। बलरामपुर, बहराइच, लखनऊ और श्रावस्ती समेत दूसरे जिलों से आए अभ्यर्थियों से 10 रुपये के बजाय 20 से 30 रुपये और कुछ यात्रियों से 50 रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई।
लखीमपुर स्टेशन से ट्रेन की खिड़की से घुसते हुए यात्री। संवाद
लखीमपुर स्टेशन से ट्रेन की खिड़की से घुसते हुए यात्री। संवाद