धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल के कैलाली और कंचनपुर समेत पांच जिलों में बंधुआ मजदूर प्रथा (कमैया) खत्म हुए करीब 23 साल हो गए हैं। इसके बाद भी यह प्रथा यहां समाप्त नहीं हो रही है, साथ ही 23 साल बीत जाने के बाद भी अभी भी ऐसे लोगों को भूमि नहीं मिल सकी है। इससे यहां के ऐसे मजदूरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल के कैलाली, कंचनपुर, बांगे, दांग और बर्दिया जिले में कमैया बंधुआ मजदूर परिवार समेत जमींदारों के घरों में काम पर रखे जाते थे। इन भूमिहीन लोगों को जमींदार कर्ज देते थे। कर्जा चुकाने में कोई विकल्प न होने पर इनको जमींदार अपने घरों में बंधुआ मजदूर के रूप में काम पर लगाते थे। इस बंधुआ मजदूरी को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा द्वारा खत्म कर मजदूरों को मुक्त करने की घोषणा की थी। साथ ही ऐसे लोगों को भूमि देने की भी घोषणा की थी।
कैलाली जिले में 953, कंचनपुर में 129, बर्दिया में 1245, दांग में 48 समेत कुल 2375 को पुनः स्थापना करना बाकी है। हालांकि पांच जिलों में 27 हजार 571 परिवार कमैया मुक्त थे। इसमें से 25 हजार, 195 परिवारों को भूमि मिल चुकी है लेकिन बाकी को 23 साल गुजर जाने के बाद भी अभी तक भूमि नहीं मिल सकी है। कैलाली जिले में करीब 953 लोगों को भूमि नहीं मिली है और कमैया बस्ती, सरकार भूमि व वन क्षेत्र के साथ ही नालों के किनारे झोपड़पट्टी बनाकर रह रहे हैं।
मुक्त कमैया समाज के अध्यक्ष पशुपति चौधरी ने बताया कि शहरी क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्र में कमैया की स्थिति दयनीय है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार समेत अन्य समस्याओं को इस समाज के लोग झेल रहे हैं, लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही है।