लखीमपुर खीरी। परिषदीय विद्यालयों में निपुण बनाने और बच्चों की बौद्धिक क्षमता परखने के लिए स्कूलों को तीन रंगों में विभाजित किया गया है। स्कूल की ग्रेडिंग के बाद मिलने वाले रंगों से बच्चों की होशियारी तय की जाएगी। ग्रेडिंग के अनुसार ही स्कूलों को लाल, पीले व हरे रंग में बांटा जाएगा। दिसंबर 2023 तक स्कूलों को निपुण बनाने का लक्ष्य रखा गया है।.
जिले में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और संविलियन विद्यालय मिलाकर कुल 3106 विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है, जहां पर पांच लाख से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं। इस समय प्राइमरी कक्षा के विद्यार्थियों को निपुण लक्ष्य के तहत पढ़ाया जा रहा है। निपुण योजना के तहत ऐसे बच्चों की बौद्धिक क्षमता का परीक्षण किया जाएगा जो कक्षा एक में हिंदी विषय में पांच सरल शब्दों में बने वाक्य शीघ्रता से पढ़ सके।
वहीं, गणित में एक अंक के जोड़ और उसे घटाने आता हों। इसके अलावा कक्षा दो में हिंदी में 45 शब्द प्रति मिनट धारा प्रवाह में पढ़ना आता हो। कक्षा तीन में हिंदी में 60 शब्द प्रति मिनट में पढ़ सकता हो। वहीं, गणित में तीन अंकीय जोड़, घटाना और दो अंक का गुणा आना चाहिए। इसी के आधार पर बच्चों के शैक्षिक स्तर को परखते हुए विद्यार्थियों को अलग अलग प्रतिशत दिए जाएंगे।
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि शत-प्रतिशत निपुण लक्ष्य लागू हो सके इसको लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान भी निपुण की प्रगति के बारे में जानकारी ली जाती है। विद्यालयों के बच्चों का शैक्षिक स्तर भी सुधर रहा है। यहां कहीं भी इस तरह की शिकायतें मिलती हैं, अध्यापकों को जरूरी दिशा निर्देश दिए जाते हैं।
रंग श्रेणी विद्यार्थियों के प्रतिशत
लाल संघर्षशील 50 प्रतिशत से कम निपुण
पीला मध्यम 50 से 80 प्रतिशत निपुण
हरा सक्षम 80 प्रतिशत से अधिक निपुण