एक तरफ केंद्र एवं प्रदेश सरकार ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, वहीं जिले के जिम्मेदार इसको लेकर बेपरवाह हैं। इनकी लापरवाही के चलते लाखों की लागत से बने स्वास्थ्य उपकेंद्र आज जर्जर हो चुके हैं। अधिकतर केंद्र तो ऐसे हैं जो निर्माण पूरा होने के बाद आज तक खोले ही नहीं गए। इन केंद्रों में झाड़ियां तक उग चुकी हैं। वहीं गांव के अराजकतत्व उनके खिड़की, दरवाजों सहित मुख्य गेट चुरा ले गए हैं। कुछ केंद्र तो जुआं खेलने का अड्ड़ा बन चुके हैं। जिस कारण एएनएम टीकाकरण के लिए गांव में किसी न किसी के दरवाजे पर या फिर स्कूल में बैठने को मजबूर हैं। इससे जच्चा-बच्चा और अन्य मरीजों को इलाज के लिए दूरदराज की सीएचसी में जाना पड़ता है। बानगी के तौर पर कुछ उपस्वास्थ्य केन्द्रों और एएनएम सेन्टर की रिपोर्ट।
पांच वर्ष से बंद है एएनएम सेंटर
ममरी। ब्लाक बांकेगंज और हैदराबाद थाना क्षेत्र की 14 मजरा गांव वाली ग्राम पंचायत रामपुर गंटर नं 18 के छत्तीपुर गांव में प्रसूता महिलाओं, बच्चों के टीकाकरण की सुविधा के लिए बना एएनएम सेंटर विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते वर्ष 2013 से बंद पड़ा है। जर्जर इमारत के भीतर और बाहर खड़ी झाड़ झक्कड़ लगे घूरे बठिया के ढेर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इसका कोई पुरसाहाल नहीं है। वजह है 2013 में एएनएम माधुरी अवस्थी की सेवानिवृत्ति के बाद आज तक किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी। इस समय गांव में आशा वर्कर जावित्री देवी और आंगनबाड़ी कार्यकत्री गीता देवी कार्यरत हैं।
खरेहटा में खिड़कियां दरवाजे टूटे, दीवारों पर उग आई घास
मैलानी। ग्राम पंचायत खरेहटा में स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली का आलम यह है कि अब यह भवन पूरी तहर जर्जर हो चुका है। दीवारों में दरार पड़ चुकी हैं, घास उग आई है और खिड़कियां, दरवाजे व फर्श भी टूट चुका है। एएनएम भवन के बजाए आसपास के घरों में बैठकर अपना काम निपटाती हैं। प्रधान अल्ला रक्खी ने बताया कि कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मौके पर जाकर भवन को दिखाकर मरम्मत की मांग की जा चुकी है, लेकिन कभी किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
उप स्वास्थ्य केंद्र में लगाए जा रहे कंडे
अमीरनगर। क्षेत्र के राजगढ़ में बना उप स्वास्थ्य केंद्र बदहाल है। देखरेख के अभाव में भवन की हालत जर्जर हो गई। एएनएम गांव में बैठने लगीं तो गांव वालों ने इसके चारों ओर कंडे लगाना शुरू कर दिया। केंद्र के अंदर से बाहर तक गंदगी का अंबार के अलावा झाड़ियां उग आई हैं। गांव वालों ने बताया कि एएनएम कब आती है, इसका पता ही नहीं लग पता। इधर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंभी में डॉक्टरों के न होने से यहां पर आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
उचौलिया में तो खंडहर बन गया स्वास्थ्य उपकेंद्र
उचौलिया। कस्बे में बना उपकेंद्र कब्जा लेने से पूर्व ही खंडहर हो गया और इसमें बाहरी लोग रहने लगे। बताते हैं कि कस्बे से बाहर भवन होने के कारण कोई कर्मचारी रहने को तैयार नहीं है और इसमें गांव के लोगों ने बसेरा बना लिया।
उप स्वास्थ्य केन्द्र पर एएनएम की तैनाती इस मंशा से की गई थी कि टीकाकरण और सामान्य प्रसव की स्थिति में लोगों को दूरदराज नहीं भागना पड़ेगा, लेकिन स्टाफ के अभाव और अन्य दिक्कतों से अधिकांश सेंटर न चलने की जानकारी है। सभी सेंटरों को सुचारु कराने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ