पिछले 50 साल से खीरी में ब्राडगेज के सपने को वर्ष 2012 के रेल बजट में पंख लगे। लोगों में उम्मीद जगी कि अब उनका वर्षों का सपना साकार होगा। ऐशबाग से पीलीभीत तक आमान परिवर्तन परियोजना को वर्ष 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन जिस धीमी रफ्तार से आमान परिवर्तन का काम चल रहा है, उससे लोगों में मायूसी है। लोगों का मानना है कि यदि इसी रफ्तार से काम हुआ तो वर्ष 2018 के पहले परियोजना का काम पूरा होना मुश्किल है।
ऐशबाग से पीलीभीत के बीच 262.76 किलोमीटर की मीटरगेज रेलवे लाइन को ब्राडगेज में बदलने के लिए वर्ष 2012 में पेश हुए रेल बजट में प्रस्ताव किया गया था। बजट स्वीकृत होने के बाद दो फरवरी 2013 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी ने लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर इसका शिलान्यास किया था। शिलान्यास हुए दो साल से अधिक समय बीत गया है लेकिन अभी तक लाइन बदलने का काम शुरू नहीं हो पाया है। पुल-पुलियों का निर्माण और प्लेटफार्म ऊंचा करने का काम अपने शुरुआती दौर में है।
तीन चरणों में पूरा होना था काम
ऐशबाग से पीलीभीत के बीच आमान परिवर्तन का काम तीन चरणों में होना था। पहले चरण में लखनऊ-सीतापुर 86.30 किलोमीटर, द्वितीय चरण में सीतापुर से मैलानी 106.18 और तीसरे चरण में 67.18 किलोमीटर क्षेत्र में आमान परिवर्तन होना था लेकिन दो साल बीत गए अभी तक पहले ही चरण का काम शुरू नहीं हो पाया है। परियोजना में रेलपथ का चौड़ा करने, छोटे-बड़े पुलों का निर्माण, ट्रैक लिंकिंग, सामान्य विद्युतीकरण, सिग्नलिंग, दूरसंचार और सिविल इंजीनियरिंग के काम शामिल हैं। परियोजना पूरा करने का दायित्व रेल विकास निगम को सौंपा गया है।
127 साल पहले लखीमपुर में दौड़ी थी पहली ट्रेन
लखनऊ-सीतापुर मीटर गेज खंड को 15 नवंबर 1886 को, सीतापुर-लखीमपुर खंड को 15 अप्रैल 1887 और लखीमपुर गोलागोकर्णनाथ खंड को 15 दिसंबर 1887 को रेल यातायात के लिए खोला गया था। इस तरह खीरी जिले में पहली ट्रेन 127 साल पहले दौड़ी थी।
आमान परिवर्तन से होंगे यह फायदे
ऐशबाग-पीलीभीत के बीच आमान परिवर्तन से खीरी जिला लखनऊ-कानपुर, दिल्ली आदि महानगरों से सीधे रेल लाइन से जुड़ जाएगा। इससे जिले का औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक विकास हो सकेगा।
पीआरओ डीआरएम आलोक कुमार ने बताया कि ऐशबाग-पीलीभीत के बीच आमान परिवर्तन का काम तेजी से हो रहा है। यह कह पाना अभी मुश्किल है कि काम कितने दिन में पूरा होगा। आमान परिवर्तन के काम में गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।