फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पिछला बाकी, इस बार भी नहीं किया भुगतान

Sun, 21 Dec 2014 10:51 PM IST
लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले की गोला चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र का करीब 50 करोड़ गन्ना मूल्य बकाया हैै। चालू पेराई सत्र में चीनी मिल चालू हुए करीब 22 दिन बीत गए हैं। इस दौरान नौ चीनी मिलों को किसान करीब 130 लाख क्विंटल गन्ना दे चुके हैैं। गन्ना खरीद करने से 14 दिन तक भुगतान के मामले में छह चीनी मिलों ने तत्परता दिखाई हैै, जबकि बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलों ने एक पैसे का भुगतान नहीं किया है।
विज्ञापन

बता दें कि कोर्ट ने 30 सितंबर, 2014 तक संपूर्ण बकाया भुगतान करने के आदेश दिए थे। इस क्रम में जनपद की आठ मिलों ने भुगतान कर दिया जबकि गोला मिल ने भुगतान नहीं किया। गोला मिल पर अभी भी करीब 50 करोड़ रुपये बाकी हैं। अब मिल प्रबंधन 31 दिसंबर तक भुगतान की बात कह रहा है।
चालू पेराई सत्र 2014-15 में गोला पर 10.49 करोड़, पलिया पर 7.28 करोड़ और खंभारखेड़ा मिल पर 10.45 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। संपूर्णानगर और बेलरायां मिल ने चालू सत्र में नवंबर तक का भुगतान किया है। इस प्रकार संपूर्णानगर पर 5.10 करोड़ और बेलरायां पर 5.02 करोड़ अवशेष बन गया है। इस प्रकार पांच मिलों पर किसानों का 38.36 करोड़ बकाया है।
विज्ञापन

भुगतान में अव्वल
गन्ना एक्ट की शर्तों के मुताबिक ऐरा मिल ने 12.59 करोड़, अजवापुर ने 16.14 करोड़, कुंभी ने 22.29 करोड़ और गुलरिया मिल ने 14.19 करोड़ भुगतान कर दिया है। लिहाजा इन पर अवशेष नहीं है। ऐरा मिल ने 10 दिसंबर तक, अजवापुर ने आठ दिसंबर तक, कुंभी ने 10 दिसंबर तक, गुलरिया ने 11 दिसंबर तक, बेलरायां और संपूर्णानगर ने 30 नवंबर 2014 तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किया है।
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि समय से भुगतान न करने पर संबंधित चीनी मिलों को ब्याज देना पड़ सकता है। इस बार मिलों पर अवशेष के साथ ही ब्याज की गणना की जा रही है।
किसानों को नही मिल रहीं पर्चियां
बेलरायां। सरयू सहकारी चीनी मिल बेलरायां से गन्ना आपूर्ति की पर्चियां न मिलने से किसान परेशान हैं। किसानों ने बताया कि फीडिंग में शीघ्र प्रजाति को सामान्य में और सामान्य को शीघ्र प्रजाति में कर दिया गया है। इसी प्रकार पौधे को पेड़ी और पेड़ी को पौधा कर दिया गया है। इसके सुधार के लिए किसान पर्ची खंड और कंप्यूटर कक्ष के चक्कर काट रहे हैं। नियमानुसार मिल गेट और क्रय केंद्र का कलेंडर बराबर चलना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। इसके चलते मिल गेट पर गन्ना आपूर्ति करने वाले किसान पर्ची को मोहताज हैं।
उधर ममरी से मिली जानकारी के मुताबिक चीनी मिल गोला को सीधे गेट से गन्ने की सप्लाई करने वाले किसानों को पर्याप्त पर्चियां न मिलने से उनकी गेहूं की बुवाई प्रभावित हुई है। परेशान किसान अपना पेड़ी गन्ना औने-पौने दामों पर कोल्हुओं, क्रेशरों पर बेचने को विवश हैं। आरोप है कि मिल सेंटर क्षेत्र की पर्चियां धड़ल्ले से निकाल रहा है, जबकि गेट क्षेत्र के किसान पर्चियां पाने को तरस रहे हैं।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें