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Lakhimpur Kheri News: कांवड़ियों की सेवा का जुनून... 11 साल से सावन में लगा रहे हैं विशेष शिविर

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शिविर में अपने चप्पल व जूते ठीक करवाते कांवड़िए। संवाद
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लखीमपुर खीरी। कांवड़ियों की सेवा का ऐसा जुनून है कि 11 साल से शहर के कुछ शिव भक्त, हर वर्ष छोटी काशी के शिव मंदिर जाने वाले कांवड़ियों की सेवा के लिए विशेष शिविर लगा रहे हैं।
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शिवभक्तों ने गोला रोड पर लालपुर के आगे आधारपुर में हाईवे के किनारे कांवड़िया सेवा शिविर लगाया है। आयोजक 11 वर्षों से हर सावन में एक माह कांवड़ियों की सेवा करके पुण्य कमाते आ रहे हैं। सेवा भी कोई छोटे-मोटे भंडारे की तरह नहीं, बल्कि एक ढाबे की तरह सारी सुविधाओं के साथ शिविर पर लंगर चलता है। यहां रुकने, ठहरने, सोने, नहाने, खाने-पीने सभी के इंतजाम हैं। महिला कांवड़ियों की व्यवस्था अलग से है।
शिवभक्त और आयोजक नटवर सिंह बताते हैं कि शहर के कई व्यापारी व अन्य लोगों के सहयोग से कार्य किया जाता है। भोले बाबा के दर्शनों के लिए जा रहे कावंड़ियों की सेवा का मौका मिलता है। उनके साथ श्रवण गुप्ता, अनिल गुप्ता, अवधेश गुप्ता, रत्नेश पांडे, इंगलेश वर्मा, मदन शुक्ला, सोनू अग्रवाल, आशीष गुप्ता, विनय, दयानन्द, सर्वेश वर्मा, अंकित गुप्ता, सतीश मिश्रा, सूरज राठौर दिन रात शिविर की पूरी व्यवस्था में लगे हैं। (संवाद)
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खान-पान के लगाए हैं 12 स्टॉल

शिविर में खाने के करीब 12 स्टॉल लगाए गए हैं। स्टॉल पर पूड़ी-सब्जी, हलवा-पूड़ी, दाल-रोटी, आलू-चाट, चना-चबेना, चाय-बिस्किट, लस्सी, जलजीरा, इडली, डोसा सांभर, माइक्रोनी आदि 24 घंटे उपलब्ध है। खाने के लिए मेज-कुर्सियां भी डाली गईं हैं।


जूते चप्पलों की सिलाई की भी है व्यवस्था

दूरदराज से आ रहे कांवड़ियों के जूते-चप्पल टूटने के बाद उन्हें दुरुस्त करने के लिए भी एक व्यक्ति नियुक्त किया गया है। जो दिन भर निःशुल्क उनकी जूते-चप्पल की सिलाई कर रहा है। चप्पल सिल रहे चेतराम ने बताया कि वह यहां प्रतिदिन सुबह आकर शाम तक बैठते हैं।


शिविर में है चिकित्साकर्मियों की भी व्यवस्था

कांवड़िया सेवा शिविर में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्साकर्मियों की भी व्यवस्था की गई है। फरधान सीएचसी से स्वास्थ्यकर्मी प्रशांत कुमार व गगन कुमार मौजूद हैं, जो कावंड़ियों को सिरदर्द, बदन दर्द, बुखार, पेट की समस्या आदि की दवाएं वितरित कर रहे हैं।


फटे-कपड़े सिलने की भी सुविधा

शिवनगरी के लिए पैदल जा रहे कांवड़ियों के रास्ते में यदि कपड़े फट जाएं या फिर सिलाई निकल जाए, इसके लिए टेलर भी बैठाया है। वहां दिनभर बैठक सिलाई का काम कर रहे मोहम्मद असलम बताते हैं कि शिविर में वह फटे या फिर उधड़े हुए कपड़ों को वह सिलकर दुरुस्त करते हैं।

शिविर में अपने चप्पल व जूते ठीक करवाते कांवड़िए। संवाद

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