रविवार को वन कर्मियों ने एक शिकारी को पकड़ा था, 24 तोते पालतू होने से बचाए थे
बांकेगंज। तराई के जंगलों और आसपास के इलाके से तोतों को पकड़कर तस्करी करने के मामले में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के वन कर्मियों की टीम ने रविवार को एक शिकारी को धर दबोचा था, जबकि उसके चार अन्य साथी भाग गए थे। इस तरह 24 तोते घरों में मिट्ठू बनने से बच गए। कोर्ट के आदेश पर इन तोतों को स्वछंद उड़ान के लिए छोड़ दिया गया। वन विभाग इससे पहले भी हजारों तोतों को पालतू होने से बचा चुका है।
तराई के जगलों के आसपास खेतों में जब खरीफ की फसल खड़ी होती है, तब बड़ी संख्या में तोते उन पर मंडराते देखे जाते हैं। इन्हीं दिनों आम की फसल भी बागों में होती है। ऐसे समय तोतों को अपना पसंदीदा भोजन मिलता है। यही उनके प्रजनन का भी अनुकूल समय होता है।
बारिश के मौसम में तोतों की संख्या में अचानक बढ़ोत्तरी होती है। शिकारी भी इसी समय सक्रिय होकर विभिन्न तरीको से तोतों को पकड़ लेते हैं और इन्हें चोरी-छिपे लखनऊ, कानपुर आदि बड़े शहरों में पहुंचा देते हैं। जहां पक्षियों के कारोबारी इन्हें अलग-अलग पिंजरों में सजाकर पक्षी पालने के शौकीन लोगों के हाथों बेचकर मोटी कमाई करते हैं। जबकि, यह कानूनन अपराध है।
वर्ष 2018 में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की महुरेना बीट जंगल से गुजरी खुटार रोड पर वन विभाग की टीम ने तीन लोगों को पकड़ा था। इनके पास से पांच बक्सों में भरे तीन हजार तोते बरामद हुए थे। इन शिकारियों को जेल भेजा गया था और कोर्ट के आदेश पर सभी बरामद तोतों को खुले आसमान में उड़ान भरने के लिए छोड़ दिया गया। यह तोते उत्तराखंड, खटीमा और उप्र के पीलीभीत जिले से पकड़कर बोलेरो मैक्सी कैब जीप में भरकर लखनऊ बिक्री के लिए ले जाए जा रहे थे। वर्ष 2020 में लखनऊ में पुलिस ने हजारों तोतों के साथ कई तस्करों को गिरफ्तार किया था। इससे पहले शाहजहांपुर में भी पक्षी तस्कर पकड़े गए थे। जिनके पास से हजारों तोते बरामद हुए थे।
पक्षियों को कैद कर पालना कानूनी अपराध है। बावजूद इसके तराई में सक्रिय पक्षी तस्कर जंगल और आसपास के इलाके से पक्षियों को पकड़कर उनकी तस्करी करते हैं। वन विभाग पक्षियों के पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए कृत संकल्प है।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन