सर्व शिक्षा अभियान के तहत इस बार मार्च में ही स्कूल चलो अभियान चलाया जाएगा, जिसमें छह से 14 वर्ष के सभी बच्चों का पंजीकरण कराया जाएगा। ताकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्य धारा से वंचित न हो। इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षक/शिक्षामित्रों और विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य प्रमुख भूमिका निभाएंगे, जिसमें वे राजकीय, परिषदीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों की गतिविधियों और उनमें प्रदान की जाने वाली सुविधाओं की जानकारी घर-घर जाकर अभिभावकों को देंगे।
बता दें कि नए शिक्षण सत्र से सीबीएसई पैटर्न पर बेसिक शिक्षा के सत्र को भी बदला गया है। इस बार नया शिक्षण सत्र एक अप्रैल से शुरू होना है, जिसके चलते शासन ने एक से 31 मार्च तक स्कूल चलो अभियान चलाकर छह से 14 वर्ष तक के स्कूल न जाने वाले या फिर अपरिहार्य कारणों से पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को चिह्नित किया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशक ने जन समुदाय के सहयोग पर जोर देते हुए अभियान से जन प्रतिनिधियों, प्रतिष्ठित व्यक्तियों और समाजसेवी संस्थाओं को जोड़ने के निर्देश दिए हैं। घर-घर जाने के दौरान अभिभावकों को स्कूलों के अच्छे वातावरण में गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराने की विभाग की वचनबद्धता से अवगत कराया जाएगा। अधिकारियों और शिक्षकों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालयों के बदले हुए परिवेश और छात्रहित की भावना के बारे में अभिभावकों को बताया जाएगा।
बाल अधिकार के तहत मिलने वाली सुविधाएं
राजकीय, परिषदीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक नि:शुल्क शिक्षा
सभी विषयों की पाठ्य पुस्तकें, दो सेट यूनिफार्म, मिड-डे-मील नि:शुल्क हैं
सुरक्षित, साफ, स्वच्छ एवं सुंदर प्रांगण और शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल
खेल मैदान, खेल सामग्री और पुस्तकालय
पुस्तकीय के साथ ही मानसिक, तार्किक एवं सामान्य ज्ञान की शिक्षा
बच्चों में नैतिक एवं चारित्रिक विकास की शिक्षा
दंड, भय, तनाव एवं भेदभाव रहित वातावरण में शिक्षण
विद्यालय प्रबंध समितियों का सकारात्मक सक्रिय योगदान