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कागजी शेर साबित हो रही जिला योजना

Sat, 08 Oct 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। 
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devlopment - फोटो : amar ujala
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छह माह बाद सिर्फ छह विभागों को मिला बजट
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2016-17 में पांच अरब तीन करोड़ छह लाख के प्रस्ताव हुए थे पास
छह विभागों को मिले 36.91 करोड़, 37 को एक भी ढेला नहीं
नगरीय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के लिए अहम किरदार निभाने वाली जिला योजना सिर्फ कागजी खानापूर्ति भर रह गई है। ऐसा इसलिए है कि पिछले कई वित्तीय वर्षों से निर्धारित परिव्यय के सापेक्ष 50 फीसदी धनराशि जिले और संबंधित विभागों को नहीं मिल पा रही है। खास यह है कि कुछ विभागों को छोड़ अन्य विभागीय मदों में प्रस्ताव के बावजूद बिल्कुल बजट नहीं दिया जाता है। इससे जिले में विकास के बड़े-बड़े दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। 2016-17 में विकास कार्यों के लिए पांच अरब तीन करोड़ छह लाख रुपये परिव्यय के प्रस्ताव पास हो चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ छह विभागों के हिस्से में 36.91 करोड़ की धनराशि आई है। 
जिला योजना में 2016-17 में कराए जाने वाले विकास कार्यों का खाका तय करने के लिए प्रभारी मंत्री एवं जिला योजना समिति के अध्यक्ष रियाज अहमद ने 27 अप्रैल 2016 को हुई बैठक में पांच अरब तीन करोड़ छह लाख रुपये परिव्यय के प्रस्तावों पर मंजूरी की मुहर लगाई थी, जो वर्ष 2015-16 के परिव्यय से 16 लाख अधिक है। इन प्रस्तावों से एकबारगी जिले में विकास के गति पकड़ने की उम्मीद दिखी थी, जो समय बीतने के साथ काफूर हो रही है। लक्ष्य के मुताबिक योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है, जिसका कारण तमाम विभागों को बजट न मिलना है। 50 विभागों में से 43 विभागों को अनुमोदित परिव्यय के सापेक्ष 37 विभागों को एक धेला भी नहीं मिला हैै।
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सिर्फ इन विभागों को मिला बजट
लघु सिंचाई विभाग को 248.34 लाख, पशु पालन को 40.60, पंचायती राज को शौचालय मद में 477.74, सीसी रोड मद में 980, पंचायत भवन निर्माण मद में 17.46 लाख रुपये, वन विभाग दक्षिण प्रभाग को 133.52, उत्तरी प्रभाग को 153.62 लाख, पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड को 35.04 लाख, निर्माण खंड एक को 78.92, निर्माण खंड तीन को 51.3 लाख और डीआरडीए को लोहिया आवास मद में 1475.375 लाख रुपये अवमुक्त किए गए हैं। 

इनको अब तक नहीं मिली धनराशि
कृषि, गन्ना, उद्यान, मत्स्य, सहकारिता, दुग्ध विकास विभाग, सिंचाई एवं जल संसाधन, राजकीय लघु सिंचाई, रोजगार कार्यक्रम, निजी लघु सिंचाई, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, वैज्ञानिक शोध, पर्यावरण, पर्र्यटन, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य, आयुर्वेदिक चिकित्सा, होम्योपैथिक, ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता, अनुसूचित जाति कल्याण, अनुसूचित जनजाति कल्याण, पिछड़ी जाति कल्याण, समाज कल्याण सामान्य जाति, सेवायोजन, शिल्पकार प्रशिक्षण, समाज कल्याण विभाग समेत 37 विभागों को अनुमोदन के बावजूद धनराशि नहीं मिली है।
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मामला शासन स्तर का है, जिन विभागों को बजट मिला है उन्हें शीघ्र कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य विभागों को इस माह बजट अवमुक्त होने की उम्मीद है। 
-अमित सिंह बंसल, सीडीओ 
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