लखीमपुर खीरी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए ग्राम पंचायत, क्षेत्र व जिला पंचायत की सीटों के आरक्षण की स्थिति जानने के लिए लोगों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षण लागू करने के फार्मूले में आवश्यक संशोधन किए जाने से आरक्षण की स्थिति में व्यापक स्तर पर बदलाव आने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों व पंचायत सदस्यों के चक्रानुक्रम आरक्षण की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल तक प्रधानों के चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, जिससे संभावना जताई जा रही है कि दो-चार दिनों में पंचायतों में आरक्षण की सूची जारी हो सकती है।
पंचायत राज विभाग ने वर्ष 1995 से वर्ष 2015 तक पांच चुनावों के लागू आरक्षण की सूची निदेशालय भेजी थी, जिसके आधार पर सीटों का आरक्षण तय होना था। वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में यूपी पंचायतराज (स्थानों व पदों का आरक्षण व आवंटन) नियमावली 1994 में 10वां संशोधन किया गया था। इसमें एक नया प्रावधान यह भी जोड़ा गया था कि सामान्य निर्वाचन के पूर्व परिसीमन की कार्रवाई जनसंख्या वृद्धि या अन्य कारणों से की जाती है, तो उस चुनाव में पिछले आरक्षणों को शून्य मानते हुए आरक्षण नए सिरे से किया जाएगा। 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए इस नियम के आधार पर 2015 के चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान के पदों के लिए नए सिरे से आरक्षण की व्यवस्था की गई, लेकिन इससे प्रदेश के चार जिलों में सीटों के आरक्षण में अड़चने आ रही थीं लिहाजा सरकार ने 2015 में नियमावली में जोड़े गए प्रावधान को समाप्त करके सभी जिलों में एक समान चक्रानुक्रम आरक्षण का रास्ता साफ कर दिया है। इसके बाद संभावित उम्मीदवारों में अपनी सीट के आरक्षण की स्थिति जानने की उत्सुकता बढ़ गई है, क्योंकि आरक्षण सूची आने के बाद ही संभावित उम्मीदवार अपनी दावेदारी जता सकेंगे। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए तो सबसे ज्यादा स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि सीट आरक्षित होने की दशा में वह होड़ से ही बाहर हो जाएंगे। कमोवेश यही स्थिति अन्य वर्गों के उम्मीदवारों में भी बनी है।
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पांच चुनावों में अनारक्षित सीटों के आरक्षित होने की सबसे ज्यादा संभावना
आरक्षण तय करते समय सबसे पहले यह देखा जाएगा कि 1995 से अब तक पांच चुनावों में कौन सी पंचायतें अनुसूचित जाति (एससी) व अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित नहीं हो पाई हैं। फिर इन पंचायतों में इस बार प्राथमिकता के आधार पर आरक्षण लागू किया जाएगा। जानकारों के मुताबिक नियमावली में संशोधन के बाद अब वह पंचायतें जो पहले एससी के लिए आरक्षित होती रहीं और ओबीसी के आरक्षण से वंचित रह गईं। वहां ओबीसी का आरक्षण लागू होगा और इसी तरह जो पंचायतें अब तक ओबीसी के लिए आरक्षित होती रहीं हैं वह अब एससी के लिए आरक्षित होंगी। इसके बाद जो पंचायतें बचेंगी, उनमें आबादी के घटते अनुपात में चक्रानुक्रम के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए होंगी। साथ ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण कोटा पूरा किया जाएगा।
कैबिनेट ने त्रिस्तरीय ग्रामीण पंचायतों की नियमावली में संशोधन कर आरक्षण व्यवस्था संबंधी आदेश जारी करने की अड़चन दूर कर दी है। इससे उम्मीद है कि दो-चार दिनों में आरक्षण संबंधी गाइडलाइन के मुताबिक सूची जारी हो जाएगी।
-सौम्य शील सिंह, डीपीआरओ
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सहकारी बैंकों और समितियों के बकायेदार नहीं लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव
लखीमपुर खीरी। जिला प्रशासन ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत सहकारी बैंकों और समितियों के बकायेदार पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। एडीएम अरुण कुमार सिंह ने इस संबंध में डीपीआरओ और सभी बीडीओ को आदेश जारी कर सहकारी बैंक व समितियों के अदेय (नो ड्यूज) प्रमाण पत्र जमा कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं बकायेदारों के वारिसों को चुनाव लड़ने से पहले बकाया भुगतान जमा करना जरूरी होगा।
एडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि सहकारी ग्राम विकास बैंक के प्रबंध निदेशक ने पत्र के माध्यम से अवगत कराया है कि सहकारी ग्राम विकास बैंकों से बांटे गए ऋण की वसूली नहीं हो पा रही है। इसी प्रकार जिला सहकारी बैंक से वित्तपोषित सहकारी समितियों से बांटे गए ऋण की वसूली की स्थिति चिंताजनक है। पंचायत चुनाव होने वाले हैं, जिसमें बड़ी संख्या में सहकारी बैंकों व समितियों के बकायेदार, सहभागीदार और वारिसान प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं। इसलिए इन बकायेदारों को पहले भुगतान जमा कर अदेय प्रमाण पत्र लेना होगा। एडीएम ने बताया कि डीपीआरओ समेत सभी बीडीओ को निर्देश दिए हैं कि नामांकन के समय प्रत्याशियों से सहकारी बैंक की शाखा और संबंधित सहकारी समितियों से जारी अदेय प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जमा कराया जाए। अदेय प्रमाण पत्र न देने वाले प्रत्याशियों का नामांकन पत्र जमा नहीं किया जाएगा। संवाद