निघासन। विकासखंड निघासन की ग्राम पंचायतों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली सामने आ रही है, जिससे स्थानीय शासन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ब्लॉक की 65 ग्राम पंचायतों में से करीब पांच पंचायतों में आज तक सचिवालय भवन नहीं हैं, जबकि आठ पंचायतों के सचिवालय जर्जर होकर पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके हैं। शासन द्वारा प्रत्येक पंचायत में पंचायत सहायक की तैनाती की गई है, ताकि ग्रामीणों के कार्य गांव में ही हो सकें, लेकिन सचिवालय न होने से उन्हें बैठने और कार्य करने की व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। इससे ग्रामीणों को आवश्यक सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
इसी तरह ग्राम पंचायत खैरीगढ़, भेड़ौरा, भैरमपुर, सिंधौना, हरसिंहपुर, बैलहा, दुबहा और धर्मापुर में सचिवालय जर्जर हालत में खड़े हैं। भवन इतने खराब हो चुके हैं कि पंचायत सहायकों के लिए बैठना तक सुरक्षित नहीं रह गया है। उधर ग्राम पंचायत बथुआ में सचिवालय का निर्माण अभी भी अधर में लटका हुआ है।
शासन की मंशा के तहत ग्रामीणों के कार्य गांव में ही निपटाने के लिए पंचायत सहायकों की तैनाती तो कर दी गई, लेकिन भवन न होने की वजह से उनके पास काम करने की कोई उपयुक्त जगह नहीं बची है। नतीजतन कई आवश्यक कार्य लंबित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सचिवालय न होने से महत्वपूर्ण अभिलेखों को सुरक्षित रखना भी चुनौती बन गया है। वहीं जर्जर भवनों में बैठना जोखिम भरा है, जिससे पंचायत सहायक भी वहां जाने से झिझकते हैं।
पंचायत भवन न होने से ग्रामीणों को छोटे से छोटे काम के लिए ब्लॉक मुख्यालय दौड़कर जाना पड़ता है, जिससे काफी दिक्कत होती है।
- जयप्रकाश मौर्य, हमीरपुर
ग्राम पंचायत भेड़ौरा में सचिवालय न होने से लोगों को भारी दिक्कत होती है। छोटे- छोटे काम के लिए निघासन जाना पड़ता है।
- महेश राज, मसुरहा
जिन ग्राम पंचायतों में सचिवालय नहीं हैं, वहां निर्माण की प्रक्रिया जारी है। प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य जल्द शुरू करा दिए जाएंगे।
- जयेश कुमार सिंह, बीडीओ
ग्राम पंचायत बथुआ में निर्माणाधीन सचिवालय।संवाद
ग्राम पंचायत बथुआ में निर्माणाधीन सचिवालय।संवाद
ग्राम पंचायत बथुआ में निर्माणाधीन सचिवालय।संवाद