लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद के लिए खोले गए क्रय केंद्रों के गोदाम भर जाने पर धान के चट्टे बाहर ही लगाए गए हैं। केंद्र प्रभारियों का कहना है कि राइस मिल मालिक धान का उठान नहीं करा रहे हैं। इसके चलते सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की डिलीवरी एफसीआई में लक्ष्य के सापेक्ष काफी कम है। ये स्थितियां धान खरीद में घोटाले को दावत देने जैसी हैं, जिसकी आशंका अधिकारियों में अंदरखाने खलबली मची है। सीएमआर की डिलीवरी तेज करने के लिए राइस मिलों पर शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है, क्योंकि क्रय केंद्रों पर 2,16,450 क्विंटल धान डंप पड़ा है।
सरकारी धान खरीद को डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सीएमआर की डिलीवरी लक्ष्य के सापेक्ष एफसीआई में नहीं हो पा रही है। क्रय केंद्रों पर खरीदा धान गोदामों में और खुले आसमान के नीचे डंप पड़ा है। राइस मिल मालिक भी धान की कुटाई में चावल में ज्यादा ब्रोकन (टूटन) होने की बात कहकर क्रय केंद्रों से धान उठाने में आनाकानी कर रहे हैं। क्रय केंद्रों पर खरीदे गए धान की राइस मिल में कुटाई करने के बाद 67 प्रतिशत की दर से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को सीएमआर की डिलीवरी करना है। अभी तक क्रय केंद्रों पर 15,10,980 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है, जिसके सापेक्ष राइस मिलर्स को 12,94,530 क्विंटल धान की डिलीवरी की गई है। राइस मिल मालिकों को डिलीवरी हो चुके धान के सापेक्ष 8,67,330 क्विंटल चावल की डिलीवरी एफसीआई को देनी है, लेकिन अभी राइस मिल मालिकों ने 3,59,200 क्विंटल चावल की डिलीवरी एफसीआई में की है। जो लक्ष्य के सापेक्ष 41.41 प्रतिशत है। जबकि राइस मिलों को 5,08,130 क्विंटल चावल की डिलीवरी एफसीआई को देना शेष है। वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद 31 जनवरी 2021 तक होनी है। पिछले वर्षों में भी राइस मिल मालिकों के पास सीएमआर फंसने के कई मामले सामने आते रहे हैं, जिसमें खाद्य विभाग को सीएमआर को पूरा करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस बार दोहरी समस्या का सामना अधिकारियों को करना पड़ रहा है। पहला तो क्रय केंद्रों पर डंप चावल और दूसरा राइस मिल मालिकों के पास फंसा सीएमआर कहीं बवाले जान न बन जाए, जिससे अधिकारियों को चिंता सताने लगी है।
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सभी मंडियों के क्रय केंद्रों पर डंप है धान
लखीमपुर की राजापुर मंडी के क्रय केंद्रों पर हजारों क्विंटल धान डंप पड़ा है, जिसे लावारिस पशु नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे ही गोला और पलिया में भी क्रय केंद्रों पर धान का स्टॉक गोदामों और चबूतरे पर पड़ा है। राज्य सरकार की एजेंसियों का पैसा धान खरीद में लगा है। अभी करीब पांच लाख क्विंटल सीएमआर की डिलीवरी होना बाकी है, जिसकी कीमत करीब 14 अरब बताई जा रही है।
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सीएमआर की डिलीवरी लक्ष्य के सापेक्ष काफी कम है, जिससे सीएमआर के फंसने की संभावना बनी हुई है। समय पर सीएमआर की डिलीवरी एफसीआई में कराना प्राथमिकता है। क्रय केंद्रों पर किसानों से खरीदे धान की डिलीवरी लेने में राइस मिल मालिक आनाकानी कर रहे हैं, जिसको लेकर मिल मालिकों से बातचीत की जा रही है। एजेंसियों और राइस मिलर्स को सीएमआर की डिलीवरी एफसीआई में कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी