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आठ दिनों में 26 किसानों से खरीदा गया है 204 मीट्रिक टन धान

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राजापुर मंडी में आढ़तियों के फड़ पर हो रही धान की खरीदारी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद शुरू हुए आठ दिन बीत गए, जिसमें अभी तक केवल 26 किसानों से 204 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है। यह धान खरीद भी तीन एजेंसियों खाद्य विभाग, एसएफसी और एनसीसीएफ के क्रय केंद्रों पर की गई है। राजापुर मंडी में खुले क्रय केंद्रों पर किसानों को कोई तवज्जो नहीं दी जा रही है, बल्कि केंद्र प्रभारी धान में अधिक नमी बताकर किसानों को लौटा दे रहे हैं। क्रय केंद्रों पर अभी लेबर और हैंडलिंग ठेकेदार नजर नहीं आते हैं, सिर्फ औपचारिकता निभाने वाले अंदाज में क्रय केंद्र खुल रहे हैं। लिहाजा किसानों को आढ़तियों के पास औने-पौने दामों पर धान बेचना पड़ रहा है। गुरुवार को मंडी में 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक धान बिका।
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सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी 1868 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों का धान खरीदने के लिए 146 धान क्रय केंद्र खोले गए हैं। इनमें से ज्यादातर केंद्रों पर खरीद की शुरूआत नहीं हो पाई है। बल्कि 20 क्रय केंद्रों पर ही खरीद की गई है। धान खरीद की तैयारियां भले ही महीनों पहले से की जा रही हैं, लेकिन अभी भी कई एजेंसियों की तैयारी पूरी नहीं हो पाई है। मसलन क्रय केंद्रों पर लेबर और हैंडलिंग ठेकेदार की व्यवस्था नहीं हो पाई है, जो धान खरीद में देरी का कारण बना हुआ है। इससे क्रय केंद्र प्रभारी भी बहानेबाजी करके धान खरीदने से बच रहे हैं। पीसीएफ के 54 और पीसीयू के 35 क्रय केंद्र खोले गए हैं, लेकिन इनमें हैंडलिंग ठेकेदार की नियुक्ति नहीं हो पाई है। मामला अभी टेंडर प्रक्रिया में ही अटका है। दूसरी ओर सरकार और प्रशासन धान खरीद में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों/केंद्र प्रभारियों को दे रही है।
राइस मिलर तेजी से खरीद रहे धान, सीएमआर में खपाने की आशंका
सरकारी धान खरीद प्रक्रिया में क्रय केंद्रों के साथ ही राइस मिलों की भी भूमिका अहम है। क्रय केंद्रों पर खरीदे जाने वाले धान की कुटाई करके सीएमआर (कस्टम चावल) राइस मिलों में ही तैयार किया जाता है। लिहाजा क्रय केंद्रों को राइस मिलों के साथ संबद्ध किया गया है। सूत्र बताते हैं कि पिछले वर्षों में दोनों के गठजोड़ से क्रय केंद्रों पर धान खरीदने के बजाय राइस मिलर के द्वारा औने-पौने दामों में धान खरीदा गया। फिर उससे तैयार चावल को सीएमआर बनाकर एफसीआई डिपो में उतारा गया। इस बार कृषि विधेयक आने के बाद से किसानों को एमएसपी दिलाने को लेकर हलचल है, लेकिन क्रय केंद्र प्रभारी और राइस मिलर साठगांठ कर फिर से मोटी कमाई करने की फिराक में हैं।
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क्रय केंद्रों पर अभी धान की खरीद नहीं की जा रही है, जिससे मजबूरन मंडी में आढ़तियों के पास सस्ते दाम पर धान बेचना पड़ा। 45 क्विंटल धान लाया था, जो 1170 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिका।
-निर्मल सिंह, किसान निवासी सुंडा कोठी
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धान में नमी होने के कारण क्रय केंद्र पर धान लेने से मना कर दिया गया। इससे मंडी में आढ़ती के पास धान बेचा, जहां 1150 रुपये में धान बिका।
-ओम प्रकाश श्रीवास्तव, किसान निवासी लखीमपुर
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पिछले सीजन में 16 अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई थी, लेकिन चालू सीजन में आठ अक्तूबर तक 204 मीट्रिक टन से अधिक धान खरीद हो चुकी है। कुछ एजेंसियों के हैंडलिंग ठेकेदार अभी नियुक्त नहीं हो पाए हैं, उनके चालू होते ही धान खरीद में और तेजी आएगी।
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लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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