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क्रय केंद्रों पर पहुंच रहे गिने-चुने किसान पर ऑनलाइन खरीद के आंकड़ों में तेजी

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लखीमपुर खीरी। सरकारी धान क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए गिने-चुने किसान ही पहुंच रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन धान खरीद के आंकड़ों में तेजी दिख रही है। क्रय केंद्रों पर प्रतिदिन अधिकतम दो से तीन किसानों का धान खरीदा जाता है, अधिकतर केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। इसके विपरीत क्रय केंद्रों की ऑनलाइन खरीद का ग्राफ तेजी से बढ़ा है।
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11 नवंबर 2022 को जहां 3029 किसानों से धान खरीद हुई थी, जो 19 नवंबर 2022 को बढ़कर 8365 किसान तक पहुंच गई। जबकि इस दौरान मंडी से लेकर गांवों में खोले गए ज्यादातर क्रय केंद्रों पर सन्नाटा नजर आया।
खरीफ सीजन 2022-23 में सीधे किसानों से धान खरीदने के लिए कुल 154 धान क्रय केंद्र खोले गए। क्रय एजेंसी खाद्य विभाग ने 28, पीसीएफ ने 62, पीसीयू ने 49, यूपीएसएस ने 11, एफसीआई ने चार क्रय केंद्र खोले हैं। शासन ने जनपद में 2,50,000 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। एक अक्तूबर से धान खरीद प्रारंभ हुई, लेकिन पूरे माह में करीब 780 किसानों से 6100 मीट्रिक टन धान खरीद हुई। इसके बाद 11 नवंबर 2022 तक 3029 किसानों से 25318 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। करीब एक सप्ताह बाद यानी 19 नवंबर 2022 तक ऑनलाइन धान खरीद का ग्राफ तेजी से बढ़ता हुआ 67240 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है और यह खरीद 8365 किसानों से की गई है।
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जमीनी हकीकत देखें तो राजापुर मंडी स्थित यूपीएसएसएस जंगलवाली क्रय केंद्र पर सन्नाटा नजर आया। एक भी किसान की तौल नहीं की जा रही थी, जबकि केंद्र प्रभारी सरोज कुमार ने बताया कि 36 किसानों से धान खरीदा गया है। ऐसे ही खाद्य विभाग के एक क्रय केंद्र पर सन्नाटा दिखा, लेकिन केंद्र प्रभारी आरडी प्रसाद ने बताया कि अब तक 93 किसानों से 7084 क्विंटल धान खरीदा गया है।
यूपीएसएसएस बेहजम क्रय केंद्र पर 67 किसानों से 5851 क्विंटल धान खरीदा गया, जबकि यहां भी केंद्र पर सन्नाटा पसरा रहा।
यूपीएसएसएस सेउढ़ा क्रय केंद्र पर भी खरीद बंद थी, लेकिन यहां भी रिकार्ड के मुताबिक 54 किसानों से 4358 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका था। ऐसे ही यूपीएसएसएस हाथीपुर क्रय केंद्र पर तौल बंद मिली, लेकिन यहां भी 68 किसानों से 5679 मीट्रिक टन धान खरीद हो चुकी थी। इसी प्रकार एफसीआई के क्रय केंद्र पर सात किसानों से 336 क्विंटल धान खरीद हुई। इधर, एकाएक खरीद के आंकड़े बढ़ने को लेकर क्रय एजेंसियों पर सवाल खड़े होने लगे हैं, तो वहीं अधिकारियों का कहना है कि क्रय केंद्रों पर आवक बढ़ने से खरीद में तेजी आई है। गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है।
इधर सूत्रों का कहना है कि क्रय केंद्रों को राइस मिलों से संबद्ध किया गया है, जिससे दोनों के बीच विधिक रूप से गठजोड़ बना है। इसी की आड़ में राइस मिल मालिक किसानों से औने-पौने दामों में खरीदे गए धान से तैयार चावल को सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) में खपा रहे हैं। इससे परिवहन का भी खर्चा बच रहा है और बिना किसी मेहनत के सस्ते धान से तैयार चावल को सरकारी खरीद के तहत एफसीआई में आपूर्ति किया जा रहा है। हालांकि अधिकारी इससे इन्कार कर रहे हैं, लेकिन पिछले सालों में ऐसे मामले पकड़े जा चुके हैं। इससे इस बार भी वैसा ही कुछ गोलमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
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सभी क्रय केंद्रों की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इससे किसी क्रय केंद्र पर गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है। क्रय केंद्र पर आने वाले किसानों से धान खरीदा गया है। अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है।
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- संतोष कुमार पटेल, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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