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कई सालों से अपडेट नहीं हुए महत्वपूर्ण आंकड़े 

Tue, 12 Jul 2016 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
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मथुरा में भी पेपर लीक
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अधूरे आंकड़ों पर खींच रहे विकास का खाका
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वर्षों पुराने आंकड़ों पर ही तैयार हो रहीं रिपोर्ट
पशुधन के आंकड़े 2007 के बाद नहीं बदले
पंजीकृत कारखानों की संख्या 2012 के बाद नहीं बदली
जिले के कई विभागों के आधे-अधूरे आंकड़ों के जरिये विकास का मैप तैयार किया जा रहा है। जिला अर्थ संख्या कार्यालय की सांख्यिकी पत्रिका में पिछले 10 सालों से कई महत्वपूर्ण विभागों के आंकड़ों में परिवर्तन नहीं हुआ है, जबकि कई योजनाएं इन आंकड़ों के आधार पर बनाई जाती हैं। विकास योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले विभागों को आंकड़े देने वाले विभाग का डाटा ही अपडेट नहीं है, तो अन्य विभागों के विकास की तस्वीर निश्चित ही धुंधली रहेगी। 
अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों और श्रमिकों के आंकड़े कई सालों से अपडेट नहीं हुए है। लघु एवं सीमांत किसानों के बारे में सांख्यिकी पत्रिका में दिए गए आंकड़े 2005-06 के हैं, जिसके आधार पर किसानों के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं। जबकि असल हकीकत है कि 10 सालों के दौरान लघु एवं सीमांत किसानों की संख्या में बड़ा परिवर्तन आ चुका हैै। पशुओं की संख्या के आंकड़े वर्ष 2007 के हैं, जिसके मुताबिक जिले में 12 लाख 94 हजार 138 है, जबकि 2003 में भी पशुओं की संख्या 12.16 लाख थी। इसी तरह पंजीकृत कारखानों और उनमें कार्यरत श्रमिकों के बारे में जो आंकड़े हैं, वह 2011-12 के हैैं। कृृषि उत्पादन, बिजली उपभोग के आंकड़े 2013-14 के बाद अपडेट नहीं किए गए हैं। जिले में सड़कों के आंकड़े 2013-14 के बाद अपडेट नहीं हुए हैं। इसी तरह जिला घरेलू कुल निवल उत्पाद के आंकड़े 2010-11 के बाद नहीं बदले जा सके हैं। जलवायु और तापमान के आंकड़े भी तीन साल पुराने हैं। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों का ब्यौरा वर्ष 2002 के बाद अपडेट नहीं हैै। सात के बजाय छह तहसीलें दर्शाई गई हैं। 1167 ग्राम पंचायतों का नए परिसीमन पर चुनाव हो चुका हैै, लेकिन पत्रिका में अभी 995 ग्राम पंचायतें दर्ज हैं। 
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कुछ विभागों के छोड़कर ज्यादातर विभागों के आंकड़े अपडेट हो चुके हैं। जिन विभागों ने समय से सूचना नहीं दी, उन्हीं के आंकड़े अपडेट नहीं हो सके हैं। नई पत्रिका के प्रकाशन में ऐसे आंकड़ों को प्राथमिकता के तौर पर संशोधित किया जाएगा। 
- एसपी वर्मा, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी
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