लखीमपुर खीरी। तीन दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को खुली जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों का रेला उमड़ पड़ा। नए और पुराने मिलाकर करीब 2000 मरीजों ने चिकित्सकों को दिखाया।
भीड़ इतनी अधिक थी कि एक मरीज को मिनटभर भी चिकित्सक नहीं देख सके। सबसे ज्यादा रोगी फिजिशियन कक्ष में पहुंचे। इसके अलावा पर्चा, जांच व दवा काउंटर पर भी कतार नजर आई। सुबह 8 बजे से ओपीडी खुलती है। दोपहर दो बजे तक चलती है। इस बीच चिकित्सक भर्ती मरीजों को भी देखते हैं। सोमवार को तमाम विभागों में 12 चिकित्सकों की ड्यूटी थी।
फिजिशियन कक्ष में डॉ. रोहित पाठक व एक अन्य चिकित्सक ने करीब 1200 मरीजों को देखा। वहीं, हड्डी रोग विभाग में डॉ. एके द्विवेदी, ईएनटी विभाग में डॉ. मनोज शर्मा, स्किन रोग विभाग में डॉ. दीपेंद्र गाैतम, सर्जन में खुद सीएमएस डॉ. आरके कोहली, मानसिक रोग विभाग में डॉ. अखिलेश शुक्ला ने मरीज देखे।
इससे पहले पर्चा बनवाने में ही मरीजों को करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। किसी तरह पर्चा बना तो चिकित्सकों के कक्ष के बाहर भीषण गर्मी में मरीजों की लंबी कतार लगी रही। पैथोलॉजी, एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड सहित दवा पाने के लिए भी मरीजों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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कैसे और कितनी खानी दवा...नहीं पता
जिला अस्पताल में चिकित्सक मरीजों को देखने के बाद दवा लिखते हैं। दवा काउंटर पर भारी भीड़ की वजह से फार्मासिस्ट मरीजों को पर्चा देखकर दवा तो थमा देते हैं, लेकिन एक साथ कई दवाइयां होने से मरीज भ्रमित हो जाते हैं। भीड़ की वजह से किसी तरह दवा तो मिल जाती है, लेकिन खाने का तरीका पता नहीं हो पाता। इससे मरीजों में असमंजस की स्थिति बनी रहती है।
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मौसम में बदलाव से इन रोगों में इजाफा
मौसम में हो रहे बदलाव की वजह से इस वक्त जिला अस्पताल में फिजिशियन के पास मरीजों की भीड़ लगी रही। अधिकतर मरीज वायरल बुखार, बदन दर्द व उल्टी-दस्त के पहुंचे। त्वचा रोग से संबंधित मरीज भी काफी पहुंचे। ईएनटी व मानसिक रोग कक्ष के बाहर भी मरीजों को चिकित्सकों तक पहुंचने में लंबा इंतजार करना पड़ा।
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वेबसाइट ठप होने से दिव्यांग हुए मायूस
सोमवार को जिला अस्पताल में दिव्यांगों का यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए शिविर का आयोजन किया जाता है। जिस वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किए जाते हैं, वह सोमवार को ठप हो गई। हालांकि, बीच-बीच में वेबसाइट चली, लेकिन कुछ ही दिव्यांगों के फाॅर्म ऑनलाइन हो सके। इससे दूर-दराज से पहुंचे दिव्यांग मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
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मरीजों का झलका दर्द
अपने पुत्र को दिखाने आई थी। चिकित्सक ने दवा लिख दी, लेकिन जब अस्पताल के दवा काउंटर से दवा ली तो करीब चार-पांच तरह की सिरप दे दी गई। इसे कैसे पिलाना है, यह नहीं बताया गया और न ही दवा पर लिखा। इसलिए बाहर मेडिकल वाले से दवा खिलाने की जानकारी की है।
सरिता, लखीमपुर खीरी
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फिजिशयन को दिखाने आए थे। पहले पर्चा काउंटर पर ही करीब दो घंटे लग गए। किसी तरह पर्चा बना तो चिकित्सक को दिखाने के लिए लंबी लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ रहा है।
हर्षित कुमार गिरि, लखीमपुर खीरी
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यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए सुबह आठ बजे आए थे। यहां आकर पता चला कि फॉर्म ऑनलाइन कराने वाली साइट ही नहीं चल रही है। इसलिए वापस जाना पड़ रहा है। अगले सोमवार को फिर से आना पड़ेगा
श्यामू पांडे