गांधी पार्क अतिक्रमण और गंदगी की चपेट में है। विभागीय लापरवाही से यह साइकिल स्टैंड बनकर रह गया है। पार्क में स्वतंत्रता दिवस पर भी किसी ने सफाई कराना उचित नहीं समझा।
मूड़ा सवारान कस्बे के बाजार में 1956 में तत्कालीन ग्राम प्रधान जगत नारायण ने इस गांधी पार्क को बनवाया था। जिस महात्मा गांधी ने देश के नाम पर अपना सर्वस्व न्योछावर किया आज अन्य दिनों की बात छोड़िए स्वतंत्रता दिवस पर भी किसी ने इस पार्क की सफाई कराना उचित नहीं समझा है। लोगों ने बताया कि 1980 के दशक में स्कूली बच्चे सड़क पर से ही महात्मा गांधी की प्रतिमा को नमन करने के बाद विद्यालय जाते थे लेकिन समय के थपेड़ों और बदलते हालात में बापू की प्रतिमा को कोई पूछने वाला नहीं है। इस पार्क की न तो कभी सफाई होती है और न ही सामने रखे खोखे हटाने का प्रयास किया गया जिससे यह प्रतिमा अब ढहने की स्थित में है। इससे गांधी प्रतिमा का वजूद ही खतरे में है।