सहकारी समितियों के माध्यम से पीडीएस के राशन और मिट्टी के तेल की बिक्री कराने की कवायद तेज हो गई है। सहकारी समितियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित दर की दुकान के आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। इस संबंध में शासन ने डीएम और डीएसओ को आदेश जारी कर दिए हैं।
जिले की अधिकतर सहकारी समितियों से अभी तक केवल खाद और बीज बिक्री होती है। ऐसे में अधिकतर सहकारी समितियां घाटे में चल रही हैं। सहकारी समितियों का व्यवसाय बढ़ाने के उद्देश्य से शासन ने अब पीडीएस का राशन सहकारी समितियों के माध्यम से बेचने की योजना बनाई है।
जिले भर में मौजूदा समय में कुल 132 प्राथमिक सहकारी समितियां हैं। मौजूदा समय में आधा दर्जन राशन की दुकानें सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित हैं। शासन का मानना है कि सहकारी समितियों के माध्यम से पीडीएस की दुकानों के संचालित होने से घपलेबाजी की संभावनाएं कम होंगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अधिक पारदर्शिता आ सकेगी।
जिले में माह नवंबर के अंत तक उचित दर की कुल 98 दुकानें रिक्त थीं। इनमें से सात दुकानों के लिए दिसंबर माह में कोटेदारों की नियुक्ति की जा चुकी है। अभी 91 कोटेदारों की नियुक्ति की जानी है। इन दुकानों के आवंटन में सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जाएगी। एआर कोआपरेटिव ने सहकारी समितियों को निर्देश दिए हैं कि यदि उनके कार्यक्षेत्र में राशन की दुकान रिक्त है तो वह इसके आवंटन के लिए अपना प्रस्ताव पूर्ति विभाग को दें ताकि उसपर विचार किया जा सके।
जिला पूर्ति अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार रिक्त राशन की दुकानों की जगह नए उचित दर विक्रेताओं के चयन में सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जाएगी। बशर्ते प्रस्ताव देने वाली समिति मानक पूरी करती हों।