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तीन अरब 22 करोड़ खर्च पर हिसाब अफसरों के पास नहीं

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मनरेगा : 2020-21 में 702 तालाबों का जीर्णोद्घार कराने का मिला था लक्ष्य, लेकिन जीर्णोद्धार दूने से भी अधिक दर्शाए
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लॉकडाउन के दौरान मनरेगा से मजदूरों को रोजगार देने के लिए सरकार द्वारा खोले गए खजाने का जमकर हुआ दुरुपयोग
लखीमपुर खीरी। लॉकडाउन 2020-21 के दौरान मनरेगा से मजदूरों को रोजगार देने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया था। अफसरों ने इसका दुरुपयोग करते हुए तय 702 तालाबों के जीर्णोद्धार के बजाय 1959 तालाबों का जीर्णोद्धार करा डाला, जो अब धरातल पर कहीं नजर भी नहीं आ रहा। यहां बता दें कि 1165 ग्राम पंचायतों में दर्शाए गए इस काम में तीन अरब से अधिक की रकम खर्च की गई है, जिसका कोई हिसाब अफसरों के पास नहीं है।
2020-21 में मनरेगा से मजदूरों को काम देने का लक्ष्य कई बार बढ़ाया गया। कभी प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए तो कभी लॉकडाउन से रोजगार छिन जाने के नाम पर लक्ष्य बढ़ता रहा, जिससे 106.24 लाख मानव दिवस सृजित किए गए। 19823 परिवारों को सौ दिन का रोजगार दिया गया। कुल तीन अरब 22 करोड़ नौ लाख 31 हजार रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें मजदूरों को दो अरब 12 करोड़ 46 लाख पांच हजार रुपये भुगतान किए जाने का दावा विभागीय अधिकारी कर रहे हैं। शेष एक अरब नौ करोड़ 63 लाख 26 हजार रुपये मैटेरियल पर खर्च किए गए हैं।
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रोजगार सृजन के लिए 702 तालाबों के जीर्णोद्घार का लक्ष्य मिला था, लेकिन सरकार से मिली छूट का फायदा उठाते हुए अधिकारियों ने 1165 ग्राम पंचायतों के 1959 तालाबों का जीर्णोद्घार करा डाला। इन तालाबों पर कितना बजट खर्च किया गया, जिसका हिसाब जिला मुख्यालय के अधिकारियों के पास नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, प्रत्येक तालाब के जीर्णोद्घार पर दो से 10 लाख रुपये तक का खर्च दिखाया गया है, तो कुछ बड़े तालाबों के खर्च का इस्टीमेट 10 लाख से अधिक का बनाया गया है। ज्यादातर तालाबों का जीर्णोद्घार कागजों पर ही निपटा दिया गया है, क्योंकि कुछ महीने बाद ही प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। लिहाजा प्रधानों और सचिवों ने मिलकर लाखों के वारे-न्यारे कर डाले। कोरोना काल के चलते अधिकारी भी तालाबों की जांच करने नहीं पहुंचे। इससे गोलमाल करना आसान हो गया।
तालाबों के हालात कर रहे अफसरों की कारगुजारी बयां
बिजुआ क्षेत्र की ग्राम पंचायत पड़रिया तुला में पुजनहिया तालाब का जीर्णोद्घार 2020-21 में कराया गया था, लेकिन मौके पर हालात एकदम उलट दिख रहे हैं। तालाब में कूड़ा-कचरा डालकर लोग अतिक्रमण कर रहे हैं। तालाब के काफी हिस्से पर लोगों ने कब्जा कर रखा है और आगे भी कब्जा करने की तैयारी जारी है। मौके की स्थिति को देखकर नहीं लगता कि पिछले वर्ष इस तालाब में किसी मजदूर ने फावड़ा भी चलाया होगा। वहीं दूसरी ओर इसी ब्लॉक की ग्राम पंचायत दरियाबाद में पुजना तालाब का सौंदर्यीकरण गुलरिया चीनी मिल के द्वारा कराया गया है। इस तालाब के सौंदर्यीकरण पर चीनी मिल ने 19 लाख रुपये खर्च किए हैं। अब इस तालाब का जीर्णोद्घार मनरेगा से दिखाकर खेल किए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
72 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य
इस वर्ष 2021-22 में मनरेगा से 72 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष अभी तक 19 लाख मानव दिवस सृजित हो चुके हैं। 79815 परिवारों को साल भर में 100 दिन का रोजगार देना है।
441 तालाबों का जीर्णोद्घार कराने का लक्ष्य
वर्ष 2021-22 में भी 441 तालाबों का जीर्णोद्घार कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बांकेगंज ब्लॉक में 31, बेहजम में 30, बिजुआ में 15, धौरहरा में 11, ईसानगर में 16, कुंभी (गोला) में 22, लखीमपुर में 85, मितौली में 49, मोहम्मदी में 22, नकहा में 40, निघासन में 16, पलिया में 13, पसगवां में 43, फूलबेहड़ में 36, रमियाबेहड़ में 12 तालाबों का जीर्णोद्घार कराया जाना है।
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पिछले वर्ष 1959 तालाबों का जीर्णोद्घार कराया गया है, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च होने का अनुमान है। अभी ब्लॉकों से तालाबों पर हुए खर्च की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। जीर्णोद्घार में गड़बड़ी की संभावना नहीं है। यदि शिकायत मिलती है तो जांच कराकर दोषियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- प्रेमप्रकाश त्रिपाठी, उपायुक्त, मनरेगा
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