पहाड़ों पर हो रही बारिश से शारदा नदी फिर उफान पर है। नदी खतरे के निशान को पार कर करीब 81 सेंटीमीटर ऊपर बहने लगी है और उसके जलस्तर में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। इससे पानी एक बार फिर से नदी के समीपवर्ती गांवों के खेतिहर इलाकों में भर गया है। इमलिया फार्म समेत अन्य गांवों के कई संपर्क मार्गों पर कई-कई फुट बाढ़ का पानी चल रहा है।
कई दिनों से पहाड़ों पर बारिश हो रही है जिससे बनबसा बैराज से भी अतिरिक्त पानी की रिलीजिंग बढ़ गई है और इसके कारण शारदा नदी के जलस्तर में लगातार इजाफा हो रहा है। रविवार की दोपहर करीब तीन बजे शारदा नदी 154.430 सेमी पर बह रही थी जो खतरे के निशान से करीब 81 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी के खतरे के निशान से इतना ऊपर जाने के कारण उसका पानी समीपवर्ती गांवों के खेतिहर इलाके में जा घुसा है। इमलिया फार्म समेत तमाम गांवों के कई संपर्क मार्गों पर बाढ़ का कई-कई फुट पानी चल रहा है। इससे लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है और एक बार फिर आई बाढ़ से फसलों के डूबने के कारण किसानों के माथों पर बल पड़ गए हैं।
बैराज गेट खुलने से मिली किसानों को राहत
इलाके के दर्जनों गांवों में भरे सुहेली के बाढ़ के पानी से लोगों को राहत मिली है। यह राहत सुहेली बैराज के सभी गेट खुलने के कारण मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि सुहेली बैराज के सभी गेट खुले रहने चाहिए ताकि बाढ़ का पानी ठहराव न ले सके। ग्रामीणों का आरोप है कि सुहेली बैराज के गेट बंद रखे जाते हैं।
तीसरे दिन भी भरा रहा बाढ़
मझगईं। सुहेली नदी का पानी इलाके में तीसरे दिन भी भरा रहा। बाढ़ के तेज बहाव के चलते चौखड़ा फार्म गांव की एक दस वर्ष पूर्व बनी पुलिया की दीवार कटकर पानी में बह गई। दीवार के नाले में समा जाने से लोग जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। ग्रामीणों ने मरम्मत की मांग की है। इसके साथ ही लियाकत पुरवा, नयापुरवा, खालेपुरवा गांवों में भी बाढ़ का पानी अभी भरा हुआ है। प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिलने से ग्रामीणों काफी गुस्सा है।