ब्लाक निघासन में विद्यार्थियों को दी जाने वाली यूनिफार्म की क्वालिटी में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। चार सौ रुपये में मिलने वाली यूनिफार्म की क्वालिटी बेहद खराब है। यह यूनिफार्म 150 रुपये में बनवाकर तैयार की जा रही है।
विभागीय जानकारों की माने तो ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को अपने प्रभाव में लेने के लिए दलालों ने पहले से नेटवर्क जमा रखा था। इधर, शासनादेश और पैसा ट्रांसफर होते ही इन लोगों ने सक्रियता दिखाते हुए स्कूलों के चक्कर काटने शुरू कर दिए हैं। बताते हैं कि इन लोगों को विभाग के ही कुछ लोगों का संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि ये लोग बेखौफ स्कूलों में पहुंचकर स्टाफ को कमीशन का लालच देकर यूनिफार्म बनवाने का ठेका ले लेते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में दलालों का असर सबसे ज्यादा है। जो स्कूल मानकों के अनुसार चलना चाहते हैं उनके प्रबंधन को डरा-धमकाकर दबाव बनाया जाता है, और तो और कुटेशन, टेंडर तक अपने स्तर से प्रकाशित करवाने का लालच देकर खेल किया जा रहा है। जानकार बताते हैं कि विभाग की तरफ से यूनिफार्म के लिए चार सौ रुपये दिए जाते हैं। इसमें पहले 75 प्रतिशत पैसा आवंटित किया जाता है। बाकी बचा हुआ यूनिफार्म वितरण और सत्यापन ओके होने के बाद रिलीज किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि दलाल 150 रुपये में यूनिफार्म सप्लाई करने की जिम्मेदारी ले लेते हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी संजय शुक्ला ने बताया कि यूनिफार्म निर्माण में पूरी
तरह से सतर्कता और पारदर्शिता बरती जा रही है। इसके लिए शासन की ओर से गाइड
लाइन जारी है। साथ ही सभी को इस संदर्भ में अवगत भी कराया जा चुका है।
शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई अध्यापक कमीशन लेता है तो
कार्रवाई की जाएगी।
पिछले सत्र में लाखों का हो चुका है घोटाला
पिछले सत्र में निघासन ब्लॉक में यूनिफार्म में लाखों का घोटाला हो चुका है। एक फर्म स्वामी की शिकायत पर जब इसकी जांच हुई तो खुद शिक्षा विभाग के लोग ही इसमें सबसे ज्यादा लिप्त मिले। इसमें कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के खिलाफ वेतन कटौती की कार्रवाई की गई थी।
यूनिफार्म पहनने में हो रही है परेशानी
स्कूली बच्चों ने बताया कि 12 से 15 रुपये प्रति मीटर के कपड़े की यूनीफार्म वितरण की जाती है जो अधिक गर्मी होने पर बदन में चुभने लगती है।