सर्च ऑपरेशन में जुटी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, डब्ल्यूटीआई और वन विभाग की टीमें
मैलानी रेंज में बाघ और तेंदुओं की चहुंओर दस्तक से ग्रामीण दहशत में हैं। संबधित रेंज की खरेहटा बीट के छेदीपुर गांव में तमाम कोशिशों के बाद बाघिन का खौफ लोगों के जेहन से अभी निकल भी नहीं पाया था कि सोमवार सवेरे 11 बजे लोगों को उत्तरी कठिना बीट के कंपार्टमेंट नंबर तीन में एक बाघ दिखा। लोगों ने इसकी सूचना कठिना मोड़ पर मौजूद डब्ल्यूडब्ल्यूएफ टीम के सदस्यों को दी। बगैर समय गंवाए बाघ के सर्च ऑपरेशन में जुटी टीम ने इसकी सूचना वन विभाग के अफसरों के साथ डब्ल्यूटीआई टीम को दी।
लोगों की सूचना पर जब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के र्सदस्य और वनकर्मी वहां पहुंचे तो टाइगर वहां से हटकर उत्तरी कठिना बीट के कंपार्टमेंट नंबर 3 में कठिना नदी की पुलिया के नीचे लंबी झाड़ियों के बीच चला गया था। बाघ के पगमार्क देखकर टीम के सदस्यों ने वहां बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की। डीएफओ साउथ संजय बिस्वाल, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ टीम के परियोजना अधिकारी दबीर हसन, रेंजर मैलानी डीएस यादव ने बताया कि इस इलाके में कई बाघ-बाघिन जंगल के अंदर घूमते हैं, इसलिए अभी यह कहना मुश्किल है कि यह छेदीपुर की बाघिन है या कोई अन्य बाघ। सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस मौके पर एफडी दुधवा सुनील चौधरी, डीडी महावीर कौजलागि, ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू इंचार्ज डीएफओ साउथ संजय बिस्वाल, एसडीओ आरपी सिंह, रेंजर डीएस यादव, उमेश राय, वीसी तिवारी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ परियोजना अधिकारी दबीर हसन, डॉ उत्कर्ष शुक्ला, वन्यजीव प्रेमी फजलू रहमान सहित वनकर्मी मौजूद रहे।
छेदीपुर में बंधे दोनों पड्डे सुरक्षित
मैलानी। डीएफओ ने बताया कि छेदीपुर में बाघिन को पकड़ने के लिए बांधे गए दोनों पड्डे पूरी तरह सुरक्षित हैं। अब वहां 15 पीआरडी जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। पूरे दिन वहां भी वनकर्मी बाघिन की निगरानी करते रहे लेकिन उसकी लोकेशन नहीं मिली, जबकि वहां रात साढ़े तीन बजे से हथिनी पवनकली और पुष्पाकली से कांबिंग कराई गई। इसके अलावा दोनों ड्रोन कैमरों से भी बाघिन की खोज की गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
बीस मिनट ही उड़ता है ड्रोन कैमरा
मैलानी। डीएफओ संजय बिस्वाल ने बताया कि छेदीपुर में बाघिन की खोज करने के लिए दो ड्रोन कैमरे आए हैं, लेकिन एक कैमरा बैट्री चार्ज होने के बाद सिर्फ 20 मिनट ही आसमान में उड़ पाता है और उसकी बैट्री डिस्चार्ज हो जाती है।