लखीमपुर-खीरी। सरकारी अस्पतालों में दशकों से चली आ रही हस्तलिखित पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने की परंपरा अब खत्म होगी। दरअसल, डॉक्टरों की लिखावट पढ़ना मुश्किल होता है। रिपोर्ट बनाने में भी समय लगता है। अब कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट देने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है।
सरकारी अस्पतालों में अब तक सभी तरह की डॉक्टरी रिपोर्ट हाथ से लिखकर दी जाती थीं। हाथ से लिखी रिपोर्ट को पढ़ना काफी मुश्किल होता था। अक्सर उसे समझने के लिए पुलिस को डॉक्टरों से संपर्क करना पड़ता था। अब ऐसा नहीं करना होगा। अब मौके पर ही कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट दी जाएगी। इसे पढ़ना आसान होगा। साथ ही उसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ का अंदेशा नहीं रहेगा।
सरकारी अस्पतालों में अपहरण, छेड़छाड़, मारपीट और दुर्घटना के मामलों में संबंधित लोगों का डॉक्टरी परीक्षण कराया जाता है। इनकी रिपोर्ट हाथ से ही तैयार की जाती है। शवों के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी डॉक्टर हाथ से लिखकर तैयार करते हैं, लेकिन अब सारी रिपोर्ट कंप्यूटर से तैयार होंगी। उनका रिकॉर्ड भी कंप्यूटर में ही रखा जाएगा, ताकि दोबारा जरूरत पड़ने पर एक क्लिक में ही रिपोर्ट मिल सके।
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जिला अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पर लगे कंप्यूटर
कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट के लिए जिला अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पर कंप्यूटर सिस्टम लगा दिए गए हैं। ऑपरेटर भी तैनात कर दिए हैं। इन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ऑपरेटरों के प्रशिक्षित होने तक दोनों तरीके से रिपोर्ट दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने पर सिर्फ कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट ही दी जाएगी।
वर्जन
कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट दिए जाने की व्यवस्था शुरू हो चुकी है। अभी शुरूआत दौर है। ऐसे में कंप्यूटराइज्ड और लिखित दोनों प्रकार की रिपोर्ट दी जा रही है। धीरे-धीरे यह व्यवस्था पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड कर दी जाएगी। इसके लिए कंप्यूटर भी लगाए गए हैं। - डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ