निघासन। झंडी मार्ग पर स्थित मैदान में आयोजित 251 कुंडीय राष्ट्रीय शौर्य प्रातः प्रज्ञायोग ध्यान के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि त्याग के बिना जीवन में कुछ भी संभव नहीं है।
उन्होंने भगवान शिव के विषपान का उदाहरण देते हुए कहा कि धर्म के मार्ग पर त्याग, शौर्य और साहस ही मानव जीवन को धन्य बनाते हैं। उन्होंने भीतर के प्रकाश को बाहर लाने का आह्वान किया। संध्या काल में आयोजित दीप महायज्ञ के दौरान अद्भुत और भव्य दृश्य देखने को मिला। इसके बाद विधि-विधान के साथ आठ पालियों में गायत्री महायज्ञ के बाद सवा लाख दीपों के साथ दीप यज्ञ के साथ सम्पन्न हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
राष्ट्रीय शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ के चौथे दिन पूरे क्षेत्र के लिए आस्था, साधना और सेवा का विराट केंद्र बन गया है। भव्य आयोजन और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं के बीच प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यज्ञस्थल पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां अर्पित कर रहे हैं। चारों ओर यज्ञमय वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास हो रहा है।
मां भगवती भोजनालय बनाकर सेवा की मिसाल पेश की
महायज्ञ परिसर में संचालित मां भगवती भोजनालय सेवा और अनुशासन का अनुपम उदाहरण बना हुआ है। यहां निरंतर नि:शुल्क भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई है। रविवार को अकेले सवा लाख श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। स्वच्छता और सुव्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रदर्शनी और गुरुदेव साहित्य बना आकर्षण
कार्यक्रम स्थल पर लगी भव्य प्रदर्शनी में अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन, विचार और साधना को चित्रों व झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया है। ‘भटका हुआ देवता’ मंदिर और समाधि स्थल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हैं। साहित्य स्टॉल पर गुरुदेव का साहित्य श्रद्धालु प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर रहे हैं।