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नहीं चेते जिम्मेदार, आखिर चली गई मरीज की जान

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डायलिसिस सेंटर।
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डॉक्टर के बिना ही किडनी रोगियों की हो रही थी डायलिसिस
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19 दिन में करीब 150 मरीजों की हो चुकी है डायलिसिस
लखीमपुर खीरी। जिला टीवी अस्पताल परिसर में बने डायलिसिस सेंटर में शुक्रवार को एक मरीज की डायलिसिस के दौरान तबीयत बिगड़ गई। इस पर उसे इमरजेंसी ले जाया गया। जहां ईएमओ ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। इस मामले में जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई है, क्योंकि डॉक्टर के बिना ही किडनी रोगियों की डायलिसिस की जा रही थी। उधर, अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। यहां बता दें कि उद्घाटन के बाद 11 अप्रैल से अब तक करीब 150 मरीजों की डायलिसिस हो चुकी है, वह भी बिना डॉक्टर की देखरेख में।
शहर की शिव कॉलोनी निवासी रवि ओमेंद्र शुक्ला अपने पुत्र अमृतांश शुक्ला के साथ डायलिसिस के लिए शुक्रवार को सेंटर पहुंचे थे। किडनी की समस्या से परेशान रवि ओमेंद्र शुक्ला की पांचवीं बार डायलिसिस होनी थी। शुक्रवार को डायलिसिस के दौरान अचानक रवि ओमेंद्र शुक्ला की तबीयत बिगड़ गई। इस पर सेंटर का स्टाफ उनको जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचा, जहां इमरजेंसी मेडिकल अफसर ने मृत घोषित कर दिया।
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मृतक के पुत्र अमृतांश शुक्ला ने बताया कि पिता को पांचवीं बार डायलिसिस के लिए लाए थे। इसके शुरू होने के कुछ ही देर बाद अचानक हालत बिगड़ने पर इमरजेंसी लेकर गए। जहां पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। एडल्ट सेंटर में मरीज की मौत स्वास्थ्य विभाग के लोगों में खलबली मच गई वही जिला प्रशासनिक अधिकारी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्य टीम गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट तलब की है। वही सीएमओ ने प्रकरण को संज्ञान में लेकर डायलिसिस सेंटर बंद करने के निर्देश दिए है।
बिना डॉक्टर हो रही थी डायलिसिस
डायलिसिस सेंटर में बिना डॉक्टर के ही डायलिसिस की जा रही थी। इसका खुलासा शुक्रवार को एक मरीज की मौत से हुआ। जिन डॉक्टर की सेंटर पर तैनाती है। वह इसका उद्घाटन होने के बाद से ही गायब हैं, जबकि पिछले दिनों निरीक्षण के दौरान एडी हेल्थ ने भी डॉक्टर के बिना डायलिसिस न किए जाने की चेतावनी दी थी, बावजूद इसके डायलिसिस की जा रही थी।
तीन सदस्यीय टीम करेगी जांच
डायलिसिस कराने आए मरीज की मौत के मामले की जांच तीन सदस्यीय टीम करेगी। अस्पताल प्रशासन इसके लिए फिजिशियन डॉ. राजकुमार, सर्जन डॉ. आरके कोली एव पैथोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह को नामित किया है।
डीसीबीसी किडनी केयर कर रही संचालन
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के प्रयासों से टीबी अस्पताल में डायलिसिस सेंटर की शुरुआत हुई। इसका संचालन पीपीपी मॉडल पर हो रहा था। डीसीबीसी किडनी केयर संस्था को इसकी जिम्मेदारी मिली थी। 11 अप्रैल को इसका विधि विधान से उद्घाटन हुआ जिस दिन किडनी के डॉक्टर संतोष की देखरेख में छह मरीजों की डायलिसिस हुई। सेंटर के सूत्रों की मानें तो उसके बाद से किडनी के डॉक्टर गायब थे। एडी हेल्थ की चेतावनी के बारे में भी सेंटर के लोगों ने अपने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया था, लेकिन फिर भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया, जिसका परिणाम सब के सामने है।
डायलिसिस कराने आए एक मरीज की शुक्रवार को मौत हो गई। डायलिसिस बिना डॉक्टर की देखरेख में हो रही थी। इसकी जांच कराई जाएगी। इसके लिए तीन सदस्य टीम गठित की गई है
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- डॉ संतोष मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल
अभी कुछ दिन पहले ही हमने ज्वाइन किया है। मरीज की इमरजेंसी में मौत होने की सूचना मिली है। जिन डॉक्टर की वहां तैनाती है, वह दो दिन के अवकाश पर चल रहे है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है।
- शुभम कुमार, रीजनल मैनेजर, डीसीबीसी किडनी केयर
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