- करारी हार ने किया भाजपा नेताओं को नए सिरे से मंथन पर विवश
- जिले की सभी लोकसभा और विधानसभा सीटों पर है भाजपा का कब्जा
भाजपा भले ही जिले की चार नगर पालिका और छह नगर पंचायतों में से दो पालिका और दो पंचायतों में भगवा फहराने में कामयाब रही हो, लेकिन विधानसभा चुनाव में एक तरफा मिली जीत के बाद दो पालिका और चार पंचायतों में मिली करारी हार ने भाजपा नेताओं को नए सिरे से मंथन करने के लिए विवश कर दिया है।
जिले की दोनों लोकसभा सीटों पर विजय पाने के बाद भाजपा का विजयरथ विधानसभा की आठों सीट जीतने तक जारी रहा। विधानसभा चुनाव में भाजपा की एक तरफा जीत के कुछ माह बाद हुए निकाय चुनाव में भी भाजपा नेता विधानसभा चुनाव जैसे ही परिणाम की आस लगाए थे। वहीं मुख्यमंत्री योगी की चुनावी सभा ने भाजपा नेताओं को सभी पालिका और पंचायत सीटें जीतने के लिए और आश्वस्त कर दिया, लेकिन नतीजों से निराशा ही हाथ लगी। हालांकि पार्टी नेता दो पालिका और दो पंचायत सीटें जीतकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन दो पालिका और चार पंचायत में मिली करारी हार ने भाजपा नेताओं को मंथन करने के लिए मजबूर कर दिया है।
दिग्गजों के घर में ही हारी भाजपा
जिले की जिन दो नगर पालिका और चार पंचायतों में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है उनमें से नगर पालिका गोला और पलिया एवं नगर पंचायत धौरहरा और मैलानी दिग्गज विधायकों के ही क्षेत्र की हैं। पलिया विधायक रोमी साहनी हों या फिर गोला विधायक अरविंद गिरि और धौरहरा विधायक बालाप्रसाद अवस्थी इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्र में एक अलग ही पहचान बना रखी है। गोला विधायक अरविंद गिरि न तो अपने क्षेत्र की नगर पंचायत मैलानी में ही कमल खिला सके और न ही पालिका गोला में। वहीं पलिया विधायक रोमी साहनी और बाला प्रसाद अवस्थी भी पलिया और धौरहरा पंचायत में कमल खिलाने में नाकाम रहे।
तीन विधायकों का गृह नगर है गोला
गोला नगर पालिका में कमल का न खिलना लोगों के गले नहीं उतर रहा। कारण, जिले के तीन विधायक गोला नगर के ही रहने वाले हैं। रामकुमार वर्मा भले ही निघासन से विधायक हों, लेकिन अब भी नगर क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत है। वहीं अरविंद गिरि वर्तमान में स्वयं विधायक हैं, जबकि पलिया विधायक रोमी साहनी भी गोला की पंजाबी कॉलोनी के रहने वाले हैं और यह तीनों ही राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। बावजूद इसके नगर पालिका गोला में कमल का न खिलना विधायकों को कठघरे में खड़ा कर रहा है।