लखीमपुर खीरी। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण देने में बैंक रुचि नहीं ले रही हैैं। शुरुआत के तीन साल तक पात्रों की संख्या ठीक-ठाक रही, लेकिन मौजूदा वर्ष में एक चौथाई पात्र ही लाभ पाने में सफल हुए हैं। चार सालों में 22,260 पात्रों को 212.27 करोड़ रुपये ऋण वितरित किया है। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या 17,405 शिशु ऋण पाने वालों की है, जिन्हें अधिकतम पचास-पचास हजार रुपये ऋण मिला है।
लघु एवं सूक्ष्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 2016-17 में लागू हुई। पहले वर्ष में 6644 पात्रों को 60.11 करोड़ रुपये ऋण वितरित किया गया। वर्ष 2017-18 में 7571 पात्रों को 71.98 करोड़ रुपये ऋण वितरित किया गया। वर्ष 2018-19 में 6390 पात्रों को 62.59 करोड़ ऋण दिया गया। वर्ष 2019-20 में आधा सत्र बीत चुका है और पात्रों की संख्या भी पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम रह गई है। सिर्फ 1655 पात्रों को 17.59 करोड़ रुपये ऋण वितरित हुआ है। चौथे वर्ष पात्र लाभार्थियों की संख्या में आई गिरावट के बारे में बैंक अधिकारी कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के चलते कामकाज करीब दो माह तक प्रभावित रहा। इससे संख्या कम रह गई। जबकि सूत्र बताते हैं कि बैंकों में आवेदन करने वालों की संख्या हजारों में है, लेकिन बैंक अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में पात्रों को तीन श्रेणियों शिशु, किशोर और तरूण में रखा गया हैं। शिशु ऋण वालों को अधिकतम 50 हजार, किशोर ऋण वालों को अधिकतम पांच लाख और तरूण ऋण पाने वाले पात्रों को अधिकतम 10 लाख रुपये ऋण दिया जाता है।
कुल 22260 पात्रों को मुद्रा ऋण दिया गया है। इसमें सबसे ज्यादा 17405 पात्रों को शिशु श्रेणी का ऋण दिया गया है। जबकि 4128 को किशोर ऋण और 727 पात्रों को तरुण श्रेणी का ऋण मिला है।
आवेदन करने वालों की संख्या अधिक है, लेकिन उद्यम के लिए अधिकांश युवाओं के पास अपनी कोई योजना नहीं होती। ऋण के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन क्या करना है? इसका उन्हें पता नहीं होता। इससे ऋण स्वीकृत नहीं हो पाता। हालांकि युवाओं को विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है, जिसमें सफल युवाओं को आसानी से मुद्रा योजना का लाभ मिल रहा है। -जितेंद्र नाथ - श्रीवास्तव, अग्रणी जिला प्रबंधक