लखीमपुर खीरी। ग्रामीण आजीविका मिशन की निदेशक की समीक्षा में लखीमपुर जिले के 374 गांव में महिला स्वयं सहायता समूह का गठन नहीं हुआ है। वहीं, शासन की समीक्षा के वितरीत विभाग का दावा है कि जनपद में शत-प्रतिशत गांवों में समूहों का गठन हो चुका है।
गांवों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की शुरुआत की थी, ताकि महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और पुरुषों से कदम से कदम मिलाकर चल सकें। विभागीय अफसरों का दावा है कि जनपद में 24 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है। कोई गांव ऐसा नहीं, जहां समूह न हों।
जबकि, पिछले दिनों मिशन निदेशक दीपा रंजन ने समीक्षा की तो प्रदेश के कई जनपदों में सैकड़ों गांव समूह से वंचित मिले। मिशन निदेशक ने समूहों का गठन कराने के लिए सभी जिलाधिकारियों सूची भेजने के साथ लापरवाही बरतने वालों की रिपोर्ट मांगी थी। शासन का एक पत्र लखीमपुर में भी आया था। लेकिन, विभागीय अफसरों का कहना है कि यहां तो शत-प्रतिशत गांवों में समूह का गठन है। शासन के पास वंचित गांवों की रिपोर्ट कहां से पहुंची कुछ भी पता नहीं है।
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समीक्षा में इन जिलों में इतने गांव में समूह गठित नहीं
शासनस्तर की समीक्षा में शाहजहांपुर 301, वाराणसी 251, सीतापुर 246, बहराइच 232, कानपुर नगर 219, गाजीपुर 1444, आजमगढ़ 989, जौनपुर 889, बस्ती 684, गोरखपुर 572, बिजनौर 598, मिर्जापुर 502, प्रतापगढ़ 502, चंदौली 482, प्रयागराज 444, बलिया 429, संत रविदास नगर 417, बरेली 388, पीलीभीत 378, संतकबीर नगर 376, लखीमपुर खीरी 374, आगरा 339, रायबरेली 336, गोंडा 332, सिद्धार्थ नगर 331 गांवों में समूह नहीं है।
शासन से एक पत्र आया था। जिसमें लखीमपुर में 374 गांवों में समूह न होने की बात कही गई थी, लेकिन जिले में शत-प्रतिशत गांवों में समूहों का गठन किया जा चुका है। शासन से जो पत्र आया था, उसका जवाब भेजा जा चुका है।
-जितेंद्र कुमार, डीसी एनआरएलएम