शहर में घूम रहा आवारा कुत्तों का झुंड। संवाद
लखीमपुर खीरी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद शहर में लावारिस कुत्तों की समस्या पर अब तक कोई ठोस कार्ययोजना लागू नहीं हो सकी है। नगर निकायों की ओर से न तो प्रभावी पकड़ अभियान चलाया जा रहा है और न ही नसबंदी और शेल्टर होम की व्यवस्था धरातल पर नजर आ रही है।
शहर के सुआगाड़ा, हिदायतनगर, रानीगंज, नौरंगाबाद और महाराजनगर समेत कई मोहल्लों में लावारिस कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। खीरी रोड, बाजारों और स्कूलों के आसपास कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय हालात ज्यादा खराब हो जाते हैं। कई बार कुत्ते राहगीरों और बाइक सवारों के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिला अस्पताल समेत विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर बड़ी संख्या में लोग एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना करीब 60 से 70 और महिला अस्पताल में 40 से 50 डॉग बाइट मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं, जिले की विभिन्न सीएचसी में प्रतिदिन लगभग 300 लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2023 में 69,881, वर्ष 2024 में 79,033 और वर्ष 2025 में अब तक 60,502 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद शहर में स्थायी डॉग शेल्टर होम की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है।