नहरों में सिल्ट की सफाई के नाम पर भी जिले में इस बार बड़ा खेल हुआ है। सिल्ट की सफाई पर अकेले सिंचाई खंड प्रथम ने फरवरी से मार्च महीने में ही 47 लाख 54 हजार से ज्यादा की रकम खपा दी, फिर भी 50 फीसदी से ज्यादा नहरों में पानी नहीं पहुंचा। खास बात यह है कि मार्च खत्म होने तक शत प्रतिशत बजट खर्च कर दिया गया।
जिले में नहरों की सफाई के लिए हर साल करोड़ों रुपया आता है। अधिकारी, ठेकेदारों और नेताओं की जुगलबंदी से इसे खूबसूरती से ठिकाने लगा दिया जाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। उदाहरण के तौर पर फरवरी महीने में ही जिले के रजबहा और अल्पिका की सिल्ट सफाई के लिए 48.24 लाख यानी अड़तालीस लाख 24 हजार से अधिक रुपया भेजा गया। इससे मार्च तक 141.45 किलोमीटर छोटी नहरों यानी अल्पिकाओं की सफाई दिखाकर 47 लाख 54 हजार रुपया खर्च दिखाया गया। इस तरह विभाग ने करीब 99 प्रतिशत काम पूरा दिखा दिया। करीब 70 हजार रुपया अभी शेष है। सूत्रों की मानें तो इस धनराशि को भी किसी और मद में खपाने की तैयारी है।
सिर्फ यही नहीं इन नहरों में से कुछ की सिल्ट सफाई का सोशल आडिट भी दिखाया गया है। सिंचाई खंड प्रथम के अधिशाषी अभियंता एसके यादव ने यह रिपोर्ट भी शासन को भेज दी है। यह अलग बात है कि सोशल आडिट भी कागजी खानापूरी से ज्यादा कुछ नहीं है।
किसान बोले. माइनर में नहीं आया पानी
सिंचाई विभाग के आंकड़ों की पोल उन क्षेत्रों के किसान खोलते हैं जहां मजदूरों से नहर में सिल्ट सफाई कराकर मोटी रकम डकारी गई है। फरधान के गांव बेलबूढ़ी के किसान मिथलेश कुमार कहते हैं कि शुरू में अल्पिका के कुछ हिस्से में पानी आया। इसके बाद अल्पिका सूखी पड़ी रही। बांकेगंज ब्लाक वनबुधेली निवासी बनवारीलाल और नरसिंहपुर निवासी श्रीपाल सिंह, डॉ. बाबूराम वर्मा, कालीचरन और रामबख्श सिंह कहते हैं कि रामपुर डॉटपुर माइनर पूरे सीजन सूखी पड़ी रही। इसी विकास खंड के गांव त्रिलोकपुर निवासी जगदीश प्रसाद और सिंगहा निवासी विजय कुमार कहते हैं कि अल्पिका में पानी न आने से फसलों की सिंचाई प्रभावित हुई है।
अधिशाषी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम एसके यादव ने बताया कि युद्धस्तर पर सिल्ट सफाई कराई गई। लगभग सभी अल्पिकाओं और रजबहों की सिल्ट साफ कराकर गांव-गांव तक पानी पहुंचाया गया, कहीं भी सिंचाई प्रभावित होने की शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई शिकायत मिलती है तो जांच कराई जाएगी।