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निर्भया को ही नहीं आधी आबादी को मिला इंसाफ

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लखीमपुर खीरी। सात साल के लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार की सुबह निर्भया के लिए इंसाफ लेकर आई। चारों दरिंदों को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया। मानवता के हैवानों के फांसी पर लटकाए जाने की खबर जिसने भी सुनी, उसने यही कहा- चलो देर ही सही निर्भया को न्याय तो मिला। दरिंदों के फांसी पर चढ़ाए जाने से छात्राएं और महिलाएं बेहद खुश नजर आईं।
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16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती बस में निर्भया के साथ जो हैवानियत की गई, वह मानवता को बेहद शर्मसार करने वाली थी। बस से फेंके जाने के बाद भी निर्भया काफी दिनों तक मौत से लड़ती रही, लेकिन अंतत: जिंदगी की जंग वह हार गई। इसके बाद पूरे देश में आक्रोश पनप गया। हर तरफ से हैवानों को फांसी देने की मांग उठने लगी। आखिरकार एक लंबे अंतराल के बाद समाज के गुनाहगारों को फांसी देने की तारीख मुकर्रर हुई, लेकिन दरिंदों ने फांसी टलवाने के लिए तमाम हथकंडे अपनाएं। इससे कुछ दिनों के लिए फांसी टल गई, जिससे आधी आबादी में निराशा छाने लगी। हालांकि निर्भया की मां और उनकी वकील ने हिम्मत नहीं हारी। दरिंदों को फांसी पर लटकवाने के लिए निरंतर लगी रही। आखिरकार उनका संघर्ष शुक्रवार को रंग लाया और चारों दरिंदों को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया।
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गुनाहगारों की फांसी होने से निर्भया को आज इंसाफ मिल गया। इससे ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा। हालांकि सजा मिलने में इतनी देर नहीं लगनी चाहिए थी।
-स्नेहा अवस्थी निवासी शारदानगर
हैवानों के फांसी पर चढ़ने का पूरा देश इंतजार कर रहा था। एक मां का लंबे समय तक इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ना काबिले तारीफ है।
-प्रियंका मिश्रा निवासी निर्मल नगर
इस दिन का बेसब्री से इंतजार था। दरिंदों के फांसी पर चढ़ने की खबर से बेहद खुशी मिली। इससे समाज के दुश्मनों को सबक मिलेगा।
-सुधा जायसवाल, छात्रा
न्याय व्यवस्था पर आज गर्व हुआ, लेकिन निर्भया को इंसाफ मिलने में इतनी देर नहीं लगनी चाहिए। थी। निर्भया की आत्मा को आज शांति मिली होगी।
- मधु प्रजापति, छात्रा
आज जो खुशी मिली है उसे बया नहीं किया जा सकता है। निर्भया को आज इंसाफ मिल गया। हालांकि न्याय मिलने में इतनी देरी नहीं होनी चाहिए।
-खुशबू, पुष्कर छात्रा
निर्भया को न्याय ही नहीं मिला, बल्कि आधी आबादी का न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ा है। दरिंदों को फांसी होने से असामाजिक तत्वों में भय पैदा होगा।
-वैशाली शुक्ला निवासी नौरंगाबाद
आधी आबादी पिछले सात साल से इस घड़ी का इंतजार कर रही थी। फांसी हो जाने से निर्भया को नही, बल्कि आधी आबादी को न्याय मिला है।
-पूनम मिश्रा, निवासी बाजपेई कॉलोनी
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