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नौ चीनी मिलों पर 22 अरब रुपये गन्ना मूल्य बकाया, किसान परेशान

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लखीमपुर खीरी। जनपद की नौ चीनी मिलों में पेराई सत्र समाप्त हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है। सभी मिलों ने इस पेराई सत्र में किसानों से 41.54 अरब रुपये से अधिक मूल्य का गन्ना खरीदा है, जिसके सापेक्ष अब तक किसानों को 46.49 प्रतिशत ही भुगतान किया गया है। कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन की बंदिशों के बाद अनलॉक हुए काफी समय बीत चुका है। ऐसे में किसानों को घरेलू कार्यों के लिए पैसे की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही। डीएम ने कई बार चीनी मिल के अध्यासियों (यूनिट हेड) को जल्द भुगतान करने के लिए चेतावनियां भी दी, लेकिन अब तक कोई असर नहीं हुआ है। बल्कि किसानों का मिलों पर 22 अरब एक करोड़ 57 लाख रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।
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जनपद की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है, जिससे 4.50 लाख गन्ना किसान जुड़े हैं। गन्ने की उपज बेचकर ही किसानों के परिवार का भरण-पोषण समेत अन्य आवश्यकताएं पूरी होती हैं। पिछले कुछ वर्षों से गन्ना मूल्य भुगतान समय से किसानों को नहीं मिल पा रहा है, जबकि गन्ना एक्ट के मुताबिक चीनी मिलों को 14 दिन के अंदर किसानों को अनिवार्य रूप से भुगतान करना आवश्यक है। 14 दिन के बाद प्रत्येक दिन का ब्याज जोड़कर किसानों को भुगतान करने का प्रावधान कानून में किया गया है। इन सारे कानूनों को चीनी मिल मालिक और उनके अध्यासी ठेंगा दिखाकर भुगतान नहीं कर रहे। कुछ चीनी मिलों जैसे ऐरा, अजबापुर, गुलरिया, कुुंभी ने एक माह से भुगतान ही नहीं किया है। जबकि गोला, पलिया और खंबारखेड़ा मिलों द्वारा धीमी गति से भुगतातन किया जा रहा है, जिससे अभी दिसंबर 2019 में खरीदे गन्ने का भुगतान नहीं हुआ है। जबकि संपूर्णानगर को छोड़कर अन्य चार मिलों ने मार्च 2020 तक खरीदे गन्ना मूल्य का भुगतान किया है।
 
कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन में मिलों की चीनी बिक्री काफी डाउन हो गई थी। इससे कुछ मिलों ने भुगतान करना रोक दिया था। अब लॉकडाउन का असर खत्म हो रहा है, जिससे चीनी बिक्री में तेजी आने लगी है। इससे मिलों को शीघ्र भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैैं।
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-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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