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निघासन कांड : सामूहिक दुष्कर्म के बाद दो बहनों की हत्या में चार अभियुक्त दोषी, 14 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा

Fri, 11 Aug 2023 04:08 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

लखीमपुर खीरी के चर्चित निघासन सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने छोटू उर्फ सुनील, आरिफ, करीमुद्दीन और जुनैद को दोषी पाया है। 14 अगस्त को चारों अभियुक्तों को सजा सुनाई जाएगी। 
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निघासन कांड के दोषी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर के चर्चित निघासन कांड में करीब 11 महीने बाद फैसला आ गया। अनुसूचित जाति की दो बहनों को सरेआम घर से अगवा कर ले जाने के बाद दुष्कर्म और फिर उनकी हत्या करने के मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को चार अभियुक्तों को दोषी करार दिया। एडीजे (पॉक्सो एक्ट) राहुल सिंह 14 अगस्त को दोषी आरिफ, करीमुद्दीन, जुनैद और सुनील उर्फ छोटू को सजा सुनाएंगे।

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यह घटना 14 सितंबर 2022 को निघासन थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। दुष्कर्म और हत्या के बाद दोनों बहनों के शव बाग में पेड़ से लटका दिए गए थे। घटना की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी। कुल छह आरोपियों को जेल भेजा गया था। इनमें से 16 वर्ष से अधिक उम्र के एक किशोर अपचारी की भूमिका पर भी अदालत 14 अगस्त को अपना निर्णय सुना सकती है। 

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छठे आरोपी के किशोर होने के कारण उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है। अदालत ने जुनैद और सुनील को हत्या व दुष्कर्म का और करीमुद्दीन उर्फ डीडी व आरिफ को साक्ष्य मिटाने का दोषी माना। इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बच्चियों के परिजनों को जल्द इंसाफ का भरोसा दिलाया था। 

पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए चौदह दिन बाद ही आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया था। अदालती सुनवाई के दौरान 12 गवाह पेश किए गए थे। मौके पर मिले पर्स, आधार कार्ड और आरोपियों के गमछे सबूत बने तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दोनों बहनों की गला घोंटकर हत्या करने की पुष्टि हुई थी। वैज्ञानिक साक्ष्य में भी सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी।

दो घंटे बाद बाग में पेड़ से लटकी मिली थीं लाशें

शाम के वक्त दो मोटर साइकिलों से आए छह लोग जब दोनों बहनों को अगवा कर ले जाने के दो घंटे बाद ही जब पड़ोस के बाग में उनकी लाशें एक ही फंदे से लटकती हुई मिली थीं। इससे ग्रामीणों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया था। तब खुद एसपी को आगे स्थिति संभालना पड़ी थी। बाद में शासन के गंभीर होने पर प्रशासन को विवेचना में भी पूरी एहतियात बरतना पड़ी। 
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अभियोजन कार्यवाहियों के लिए खुद डीएम और एसपी की मॉनिटरिंग में एडीजीसी बृजेश पांडेय को मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई। बचाव पक्ष से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश सिंह मुन्ना के आने के बाद एडीजीसी संजय सिंह को भी अभियोजन टीम में शामिल किया गया था। वहीं, मृतका के परिजनों ने हाईकोर्ट के वकील एसके सिंघानियां को अलग से पैरवी के लिए नियुक्त किया था।
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