बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के आसपास बसे किसानों के सपने जंगली हाथी पैरों तले रौंद रहे हैं। जंगल से निकलकर हाथी खेतों में खड़ी गन्ना और केला, मिर्च और लाही की फसलों को तबाह कर रहे हैं। इस नुकसान का मुआवजा मिलने में उन्हें महीनों तो कभी-कभी सालों लग जाते हैं।
नेपाल के शुक्ला फांटा नेशनल पार्क से निकलकर 35 हाथियों का दल एक माह पहले दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों में डेरा जमाए हुए है। इस बीच यह हाथी मझगई, बसंतापुर, चौखड़ा फार्म, गुलरा, मोहम्मदी, पहाड़नगर, सठियाना, राम नगर, शीतलापुर, घोला, फरसैहया और बेलरायां रेज सटे गांवों में पहुंच रहे हैं। यहां के किसान इन हाथियों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आए दिन हाथी जंगल से निकलकर खेतों में आ धमकते हैं। देखते ही देखते खेतों के खड़ी फसलों को खाने के साथ ही उसे रौंदकर तबाह कर देते हैं। हर साल सैकड़ों किसानों को हाथियों से होने वाले नुकसान को झेलना पड़ रहा है।
किसान बाेले- नहीं मिलता है मुआवजा
हाथियाें से प्रभावित बांकेगंज, गोला और मोहम्मदी क्षेत्र के किसानों प्रेमचंद्र, असूदहन बेगम, मोहनलाल, अमरजीत सिंह समेत सैकड़ों किसानों ने बताया कि पिछले पांच-छह सालों से नेपाली हाथियों के पैरों तले उनकी फसलें रौदीं जा रही है। बावजूद इसके मुआवजे के नाम पर उन्हें धेला नहीं मिला। इसके लिए विभाग से क्षति के मुआवजे के कई प्रार्थना दिए गए। राजस्व कर्मियों ने फसल नुकसान का सर्वे भी किया। वन विभाग की ओर से जांच रिपोर्ट भी लगाई गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
-डीटीआर बफरजोन के आसपास जंगल से सटे इलाके नेपाली हाथियों से प्रभावित हैं। हाथी किसानों की फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। साथ ही हाथियों से जिन किसानों की फसलों का नुकसान होता है, उस नुकसान का सर्वे कराकर उन्हें मुआवजा भी वन विभाग की ओर से दिया जा रहा है।
- कीर्ति चौधरी, डीएफओ, बफरजोन