धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल सरकार ने पिछले दो दशकों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नेपाली नागरिकता हासिल करने वाले विदेशी नागरिकों के मामलों की जांच के लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इसके तहत जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने दोहरी नागरिकता अथवा संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता प्राप्त करने वालों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी है।
भारतीय सीमा से लगे कैलाली जिले में पिछले माह धनगढ़ी उपमहानगर पालिका वार्ड-12 के तत्कालीन वार्ड अध्यक्ष गणेश प्रसाद जोशी को भारतीय नागरिक अलियास अंसारी के पक्ष में कथित रूप से झूठी सिफारिश करने के आरोप में पकड़ा गया था। इसके अलावा विभिन्न जिलों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों, बिचौलियों तथा अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
नेपाल सरकार ने संवत 2063 (2006) से संवत 2082 (2026) के बीच जारी नागरिकता प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि फर्जी दस्तावेज, जालसाजी या मिलीभगत से प्राप्त नागरिकता पाए जाने पर उसे निरस्त कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए 77 जिलों के जिलाधिकारियों को पुराने रिकॉर्ड और सिफारिशों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले के बाद संदिग्ध नागरिकता मामलों से जुड़े लोगों में चिंता बढ़ गई है।