धनगढ़ी। 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा निर्वाचन से पहले नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के संरक्षक रेशम चौधरी को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन को लेकर निर्वाचन आयोग के फैसले को बरकरार रखा।
कैलाली निर्वाचन क्षेत्र संख्या एक से रेशम चौधरी ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। उनके नामांकन पर निर्दलीय प्रत्याशी सत्य नारायण भट्टराई ने शिकायत दी कि वर्ष 2015 के चर्चित टीकापुर हत्याकांड में चौधरी मुख्य आरोपी हैं और उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। इस कारण चौधरी चुनाव लड़ने के पात्र नहीं हैं।
निर्वाचन अधिकारी देवराज ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन निर्देशिका के तहत उनका नामांकन रद्द कर दिया। निर्वाचन आयोग के इस फैसले के खिलाफ रेशम चौधरी ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस सारंग सुवेदी और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त खंडपीठ ने कहा कि कानून की नजर में सजायाफ्ता व्यक्ति चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकता। न्यायालय ने निर्वाचन अधिकारी की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए चौधरी की याचिका को खारिज कर दिया।
रेशम चौधरी की दावेदारी खत्म होने के बाद कैलाली-1 का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गया है। नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है।