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रिटायरमेंट के बरसों बाद भी पालिका कर्मचारियों का नहीं हुआ भुगतान

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मुन्ना लाल
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लगभग सौ पेंशनरों की पालिका पर बकाया है तीन करोड़ से अधिक की धनराशि
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दस साल पहले रिटायर हो चुके कर्मचारी आज भी पालिका के लगा रहे चक्कर
लखीमपुर खीरी। हर कर्मचारी एक सपना देखता है रिटायरमेंट होने पर मिलने वाली पेंशन से घर की दाल रोटी चलेगी और फंड आदि के पैसे बेटे बेटियों की शादी पर खर्च होंगे या उन्हें स्वरोजगार कराने पर। मगर, पालिका प्रशासन की लापरवाही और मनमानी के कारण सेवानिवृत्त पालिका कर्मियों के सपनों पर पानी फिर रहा है। रिटायर्ड कर्मचारी अपने देयक पाने के लिए पिछले कई बरस से नगर पालिका के चक्कर लगा रहे हैं। करीब 100 सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पालिका पर ढाई से तीन करोड़ रुपये बकाया है।
2018 में रिटायर पालिकाकर्मी को न तो समय पर फंड का पैसा मिला और न ही पेंशन। कई बार चक्कर लगाने के बाद पेंशन तो मिलनी शुरू हो गई, लेकिन फंड का पैसा पिछले चार साल से टुकड़ों में दिया जा रहा है। इस तरह 2012-13 में सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को अभी तक फंड आदि का भुगतान नहीं मिला।
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रिटायर होने के दो माह बाद भी नहीं मिली पेंशन
शहरपुरा कोठी निवासी मुन्ना लाल वाल्मीकि 28 फरवरी को रिटायर हो चुके हैं। न तो इन्हें अब तक पेंशन मिली है और न ही अन्य कोई देयक। मुन्ना लाल ने बताया कि ईओ साहब बताते हैं कि लेखाकार को पेंशन आदि का भुगतान करने के लिए कह दिया है, लेकिन लेखाकार कोई निर्देश न मिलना बताते हैं। मुन्ना लाल ने बताया कि पिछले स्कूटी से गिर गए थे, एक्सरे कराने पर पसलियों में चोट आई है। डॉक्टर इलाज के लिए कह रहे हैं, लेकिन जब पैसे ही नहीं हैं तो इलाज कैसे कराएं। इसलिए बेल्ट बांधकर काम चला रहे हैं। पेंशन और फंड कब तक मिलेगा यह भी कोई नहीं बता रहा है। हर बार आश्वासन दे दिया जाता है।
ये है कर्मचारी नियमावली
कर्मचारी सेवा नियमावली के अनुसार, जिस दिन कर्मचारी रिटायर हो उसी दिन उसके सारे देयकों का भुगतान हो जाना चाहिए। पेंशन भी उसी दिन जारी हो जानी चाहिए। इसके लिए छह माह पहले ही कर्मचारियों को रिटायरमेंट होने की जानकारी देने के लिए नोटिस जारी करने का नियम है। ताकि उसके देयकों की पत्रावलियां तैयार की जा सकें, लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं। इस कारण रिटायरमेंट के दिन कर्मचारियों को न तो फंड का पैसा मिल पाता है और न ही पेंशन ही बन पाती है। ऐसे में कर्मचारी सालों तक पालिका के चक्कर लगाते रहते हैं।
बरसों से बिगड़े चल रहे हैं पालिका के हालात
कर्मचारी संगठन के लोगों का कहना है कि पिछले कई साल से नगर पालिका की व्यवस्था बिगड़ी चल रही है, जिस कारण कर्मचारियों को रिटायर होने के बाद न तो देयकों का भुगतान ही हो पा रहा है और न ही पेंशन मिल पा रही है। इसके लिए कई बार पालिका ईओ से लेकर अध्यक्ष तक को ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। करीब 100 सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पालिका पर ढाई से तीन करोड़ बकाया है। वहीं हर माह तीन चार कर्मचारी रिटायर भी हो रहे हैं।
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किसी को शॉल तो किसी को कुछ भी नहीं मिल रहा
नगर पालिका में रिटायर मेंट होने वाले कर्मचारियों के साथ भी भेदभाव का रवैया अपना रहा है। किसी को समारोह कर शॉल, श्रीराम दरबार की फोटो एवं हाथ व दीवार घड़ी देकर विदा किया जाता है तो किसी को यह भी नसीब नहीं हो रहा है। पालिका प्रशासन न तो उन्हें स्मृति चिह्न देता है और न ही पेंशन एवं फंड आदि की धनराशि।
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