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ड्यूटी धर्म निभाने के लिए बच्चों से दूरी बनाएं हैं मां

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लखीमपुर खीरी। एक मां ही है जो बिना किसी स्वार्थ के अपनों बच्चों को प्यार दुलार करती है। बच्चों के लिए वह हर इम्तिहान देने को तैयार रहती हैं। मगर मौजूदा समय में कोरोना मांओं का इम्तिहान ले रहा है। वह भी बच्चों से दूर रहने का। तमाम मांएं ऐसी हैं जो या स्वास्थ्य कर्मी हैं या फिर पुलिस कर्मी। एक तरफ इन पर जहां लोगों की सेवा करने की जिम्मेदारी है तो वहीं दूसरी ओर बच्चों का लालन पालन करने की। मगर कोरोना की चपेट में आकर इन मांओं ने अपनी ममता को काबू कर बच्चों को दूर रखा। कोरोना से जंग जीतने के बाद फिर से मानवता की सेवा में लगकर स्टाफ नर्स एवं महिला पुलिस कर्मी मां के साथ साथ अपनी ड्यूटी का फर्ज एक साथ निभा रही हैं।
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एक घर में रहकर भी बच्चों से हूं दूर
शहर निवासी रेखा वर्मा जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। पिछले साल से कोरोना काल में ड्यूटी कर रही हैं। संक्रमितों के संपर्क में आकर 21 अप्रैल को पॉजिटिव र्हुइं। होम आइसोलेट होकर कोरोना को मात दी। पति एवं बच्चों की सेहत का ख्याल रखते हुए सभी को गांव भेजकर 14 दिन घर में अकेले रहीं। रेखा वर्मा के दो बेटे हैं। एक 16 साल का और दूसरा आठ साल का। वह बताती हैं कोरोना से जंग जीतने के दूसरे दिन से ही ड्यूटी ज्वाइन की। परिवार से अभी भी दूरी बनाकर रखी है, क्योंकि वार्ड में मरीजों की सेवा करनी पड़ती है। बताया कि रविवार को मदर्स डे के साथ छोटे बेटे का बर्थ डे भी था। मगर कोरोना संक्रमण को देखते हुए बच्चे का समझा दिया कि बर्थ-डे अगले साल मना लेंगे, क्योंकि इस समय कोरोना को हराना जरूरी है।

ड्यूटी फर्ज निभाने के लिए बेटी से बनाई दूरी
मां की जिम्मेदारी बहुत बड़ी होती है। इसका एहसास मां बनने के बाद हुआ। अपने बच्चे से दूर रहना कितना मुश्किल है, इसकी हकीकत कोरोना काल में हुई। यह कहना है पुलिस लाइन में तैनात महिला सिपाही रश्मि मिश्रा का। रश्मि बताती हैं जब से कोरोना काल शुरू हुआ है। तब से कई- कई दिन बेटे से अलग रहना पड़ता है, क्योंकि ड्यूटी के दौरान लोगों का ऑफिस में लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में संक्रमित होनेेे का खतरा रहता है। ऐसे में बेटे से खुद को दूर रखने का निर्णय लिया। ड्यूटी से जाने के बाद बेटा पास आने की जिद करता है, लेकिन मजबूरी वश उसे दो से चार घंटे तक दूर रखना पड़ता है।
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बेटी से नहीं होती हर रोज मुलाकात
फरधान। पीएचसी कालाआम में तैनात एएनएम रुचि वर्मा कोरोना काल में निरंतर ड्यूटी कर रही हैं। इनकी आठ साल की बेटी अनुकृत वर्मा हैं। ड्यूटी धर्म निभाते हुए बच्चों का टीकाकरण, संक्रमितों के घर दवा पहुंचाना, संक्रमित की पहचान के लिए घर घर सर्वे करना पड़ता है। पति के सहारे बेटी को घर छोड़कर आती हूं। सर्वे के दौरान कई बार सर्दी जुकाम बुखार होने के साथ खांसी आने लगती है। ऐसे में एक-एक सप्ताह तक बेटी से दूर अलग कमरे में रहती हूूं। हमारा देश कोरोना महामारी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में हम स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है। ड्यूटी धर्म निभाने साथ साथ मां की जिम्मेदारियों का भी निवर्हन कर रही हूं।

ड्यूटी के दौरान हुईं संक्रमित, दो साल के बेटे से बनाई दूरी
बिजुआ। बिजुआ सीएचसी की स्टाफ नर्स अंजली दीक्षित प्रसव वार्ड में ड्यूटी करती हैं। प्रतिदिन प्रसव कराने के साथ गर्भवती महिलाओं की चिकित्सीय राय भी देनी पड़ती है। ड्यूटी धर्म निभाते हुए अंजली कोरोना पॉजिटिव हुईं। पिछले करीब 12 दिन से होम आइसोलेट हैं। इस दौरान उन्होंने दो साल के बेटे से दूरी बनाकर रखी है। केवल फोन पर ही बात करती हैं। किसी आशा या मरीज को कोई परेशानी हुई या फिर मरीज को कोई समस्या है तो अंजली फोन पर ही उसे राय देती हैं और डॉक्टर के पास भेज देती हैं।
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