हेराफेरी पर लग सकेगी लगाम, बच्चों को मिलेगा गुणवत्तापरक भोजन
मां अभियान के तहत बनाए जाएंगे छह सदस्यीय महिला समूह
बीएसए ने आदेश का अनुपालन कराने के लिए सभी बीईओ को दिए निर्देश
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील पर अब ‘मां’ की नजर रहेगी, जो प्रतिदिन गुणवत्ता को परखेगी। इससे मिड डे मील में की जाने वाली हेराफेरी पर लगाम लगाई जा सकेगी और बच्चों को भी गुणवत्तापरक भोजन मिलेगा। सरकार ने इसे मां अभियान का नाम दिया है। महिला समूह में से प्रतिदिन एक महिला विद्यालय जाकर मिड डे मील को देखकर चखेगी, जिसके लिए बाकायदा रोस्टर बनाया जाएगा। इसके अलावा भोजन पकाने और परोसे जाने की विधि का अवलोकन करते हुए रिपोर्ट संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को दी जाएगी। बीएसए संजय कुमार शुक्ला ने इस आदेश का अनुपालन कराने के लिए सभी बीईओ को निर्देश दिए हैं।
मध्यान्ह भोजन योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील की गुणवत्ता का अनुश्रवण करने के लिए प्रत्येक विद्यालय में छह सदस्यीय महिला समूहों का गठन किया जाएगा। समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए परिषदीय स्कूल में अध्ययनरत बच्चे की अभिभावकों (मां, बहन, ताई, चाची, दादी, बुआ) में से चयन का प्राविधान किया गया है। छह महिलाओं के चयन में उनके साक्षर होने पर जोर दिया जाएगा। ताकि प्रभावी ढंग से मिड डे मील का संचालन व अनुश्रवण किया जा सके। छह सदस्यीय समूह में से रोस्टर के मुताबिक प्रतिदिन एक महिला विद्यालय जाकर निरीक्षण करेगी, जहां पर रोस्टर रजिस्टर पर टिप्पणी अंकित करने के साथ ही सुझाव दर्ज कराएंगी।
इन बिंदुओं पर रहेगी नजर
1. पके पकाए भोजन की गुणवत्ता का अनुश्रवण।
2. प्रत्येक छात्र को मानकानुसार भोजन की मात्रा प्राप्त हो रही है या नहीं।
3. रसोई और बर्तनों की साफ-सफाई।
4. दूध और फल वितरित किए जाने का समय।
5. निर्धारित मीनू के मुताबिक भोजन दिया जा रहा या नहीं।
6. रसोइये का मानदेय समय से दिया जा रहा है या नहीं।
7. भोजन सामग्री समय से उपलब्ध कराई जा रही या नहीं।
मिडडेेमील की निगरानी के लिए संगठित तंत्र विकसित किया जाएगा, जिससे गड़बड़ियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही बच्चों को गुणवत्तापरक भोजन मिलना सुनिश्चित हो सकेगा।
संजय कुमार शुक्ला, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी